बिहार-झारखंड
बिहार में स्थापित होगा ‘महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, डिजिटल क्रांति की ओर बड़ा कदम
बिहार में स्थापित होगा ‘महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’, डिजिटल क्रांति की ओर बड़ा कदम
तकनीक और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए बिहार सरकार ने राज्य में ‘महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सरकार ने वैश्विक डेटा और एनालिटिक्स कंपनी Tiger Analytics के साथ समझौता किया है। यह समझौता हाल ही में आयोजित AI Impact Summit 2026 के दौरान संपन्न हुआ, जिसने बिहार के तकनीकी भविष्य को नई दिशा देने की संभावनाएं मजबूत कर दी हैं।
क्या है महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस?
प्रस्तावित ‘महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और उभरती डिजिटल तकनीकों के शोध एवं प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र होगा। इसका उद्देश्य केवल तकनीकी शोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करना, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देना और उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाना भी इसका हिस्सा होगा।
यह केंद्र तकनीक, डेटा अनुसंधान और स्किल-डेवलपमेंट को एक ही मंच पर लाएगा, जिससे राज्य में डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
डिजिटल विकास को मिलेगी नई रफ्तार
राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना से बिहार डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। लंबे समय से बिहार को शिक्षा और प्रतिभा के लिए जाना जाता है, लेकिन अब तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी राज्य अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
एआई सेंटर की स्थापना से—
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सरकारी सेवाओं में डिजिटल सुधार संभव होगा
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डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी
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हेल्थ, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और इंडस्ट्री सेक्टर में स्मार्ट समाधान विकसित किए जा सकेंगे
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युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा
युवाओं के लिए रोजगार और स्किल-डेवलपमेंट
बिहार के लाखों युवा हर वर्ष रोजगार के बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर जाते हैं। सरकार की कोशिश है कि ऐसे अवसर अब राज्य के भीतर ही विकसित किए जाएं।
इस सेंटर के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे, ताकि प्रशिक्षण के बाद छात्रों को सीधे रोजगार या स्टार्टअप शुरू करने में मदद मिल सके।
उद्योग और शिक्षा के बीच सेतु
प्रस्तावित सेंटर विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा। यह केंद्र शोध परियोजनाओं, इंटर्नशिप कार्यक्रमों और इंडस्ट्री-एकेडमिक पार्टनरशिप को मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो बिहार पूर्वी भारत का एक प्रमुख टेक्नोलॉजी हब बन सकता है।
सरकारी सेवाओं में एआई का उपयोग
सरकार की योजना है कि एआई तकनीक का उपयोग प्रशासनिक सुधारों में भी किया जाए। उदाहरण के तौर पर—
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कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान
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स्वास्थ्य सेवाओं में रोग पहचान प्रणाली
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स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट
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डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन
ऐसे समाधान न केवल पारदर्शिता बढ़ाएंगे, बल्कि आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं भी प्रदान करेंगे।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सेंटर में इनोवेशन लैब, इनक्यूबेशन हब और फंडिंग सहायता की व्यवस्था की जाएगी, जिससे युवा उद्यमी अपने विचारों को व्यवसाय में बदल सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई आधारित स्टार्टअप्स भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बन सकते हैं और बिहार इस दिशा में शुरुआती बढ़त ले सकता है।
संभावित स्थान और बुनियादी ढांचा
हालांकि अंतिम निर्णय की घोषणा बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि इस सेंटर की स्थापना राजधानी पटना या किसी प्रमुख शैक्षणिक नगर में की जा सकती है, जहां पहले से बेहतर बुनियादी ढांचा और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हों।
सेंटर में अत्याधुनिक लैब, हाई-स्पीड डेटा सर्वर, रिसर्च फसिलिटी और प्रशिक्षण कक्ष होंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य किया जा सके।
राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व
भारत सरकार भी डिजिटल इंडिया और एआई मिशन पर विशेष जोर दे रही है। ऐसे में बिहार का यह कदम राष्ट्रीय डिजिटल लक्ष्यों के अनुरूप है।
यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकती है। साथ ही, वैश्विक कंपनियों का ध्यान भी बिहार की ओर आकर्षित हो सकता है।
निष्कर्ष
महा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना बिहार के लिए केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि विकास की नई परिकल्पना है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों में व्यापक बदलाव की उम्मीद है।
बिहार अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि डिजिटल युग में अग्रणी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल किस तरह राज्य की तस्वीर और तकदीर बदलती है।

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