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उत्तर प्रदेश

‘अनिल मिश्रा की देखरेख में होती थी चोरी…’ राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों का बड़ा दावा, बताया कैसे होता था सब कुछ

राम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की चोरी के मामले में पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. कोर्ट से विशेष अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने कल जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक सघन पूछताछ की है. इस दौरान आरोपियों ने न सिर्फ करोड़ों रुपये की चोरी की बात स्वीकार की बल्कि पूरी साजिश के घटनाक्रम से भी पर्दा उठा दिया है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूछताछ के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम एक बार फिर सामने आया है. आरोपियों ने बताया कि दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में अनिल मिश्रा की मुख्य भूमिका रहती थी.

दो घंटे तक चली पूछताछ

इस पूरे मामले में पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार को केस दर्ज किया था जिसके बाद शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव समेत गणनाकर्मी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. मंगलवार को पुलिस की टीम ने कोर्ट की इजाजत लेकर जेल में बंद इन आरोपियों से तीखे सवाल-जवाब किए. सूत्रों के मुताबिक, सबसे अधिक बरामदगी आरोपी अविनाश मिश्रा के पास से हुई थी. इसी वजह  से पुलिस ने उससे सबसे लंबी और विस्तृत पूछताछ की जिसमें चोरी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग हाथ लगे.

चाबियों का खेल और आरोपियों की मिलीभगत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूछताछ में यह बात साफ हो गई है कि चढ़ावे की रकम को पार करने का खेल पूरी मिलीभगत से चल रहा था. दान राशि की  गिनती कक्ष की मुख्य चाबी चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव के पास रहती थी जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी. टिन्नू यादव और बैंक कर्मियों की आपस में साठगांठ थी, जिसके दम पर इतनी बड़ी रकम को आसानी से गायब कर दिया जाता था. इस कमाई और चोरी की रकम में टिन्नू यादव के साथ-साथ बैंककर्मी भी अपना-अपना हिस्सा लेते थे.

सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए बनाया था खास प्लान

पूछताछ में आरोपियों ने चोरी करने के शातिराना तरीके को भी कबूला जिससे वो सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंक रहे थे. बता दें कि टिन्नू यादव खुद इस साजिश में शामिल था इसलिए आरोपियों से कोई सवाल-जवाब करने वाला नहीं था. आरोपियों को अच्छे से पता था कि परिसर में सीसीटीवी कैमरे कहां-कहां लगे हैं. कैमरों की नजर से बचने के लिए उन्होंने एक खास तरकीब भी निकाली थी. जब एक आदमी रकम पार कर रहा होता था तो बाकी के लोग उसे चारों तरफ से घेर कर खड़े हो जाते थे ताकि कैमरे में कुछ रिकॉर्ड न हो. इसके बाद उस रकम को अस्थायी रूप से बाथरूम में छपा दिया जाता था और मौका मिलते ही उसे परिसर से बाहर सुरक्षित निकाल लिया जाता था. ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के करीबी होने का फायदा उठाकर ये बिना किसी चेकिंग के बच निकलते थे.

सुरक्षा और निगरानी में भारी लापरवाही

मंदिर परिसर के अंदर बने आधुनिक कंट्रोल रूम से सभी कैमरों की निगरानी की जाती है लेकिन इस मामले में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है. आरोपियों ने पुलिस के सामने यह बड़ा सच उगला है कि वहां सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी के लिए जो लोग तैनात किए गए थे, वे सिर्फ अपनी ड्यूटी की औपचारिकता पूरी कर रहे थे. धरातल पर किसी भी तरह की कोई ठोस निगरानी नहीं रखी जा रही थी. आरोपियों को इस घोर लापरवाही की पूरी जानकारी थी जिसके कारण वे बिना किसी डर या फिक्र के लगातार बड़ी रकम पार करते रहे.

जमीन और मकान में खरीदने में लगाई चोरी की रकम

करोड़ों रुपये के इस चढ़ावे को ठिकाने लगाने के सवाल पर आरोपियों ने कबूला कि उन्होंने चोरी की इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल अपनी संपत्ति बढ़ाने में किया. आरोपियों ने इस पैसे को जमीन और आलीशान मकान खरीदने में लगा दिया था. पूछताछ के अंत में आरोपियों ने यह भी माना कि उन्हें इस बात का कतई अंदाजा कि उनका यह पूरा का पूरा खेल इतनी जल्दी उजागर हो जाएगा और वे कानून के शिकंजे में आ जाएंगे. फिलहाल पुलिस इस मामले में अनिल मिश्रा की भूमिका और संपत्ति की बरामदगी को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है.

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