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एमपी हाई कोर्ट के फैसले के दो माह बाद भी भोजशाला में नई व्यवस्था अधूरी, श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए ASI गाइडलाइन का इंतजार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र मानने के निर्णय के बाद यहां श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए प्रशासनिक कार्ययोजना और गाइडलाइन बनाई जानी थी, उसे निर्णय के दो माह बाद भी लागू नहीं किया जा सका है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं के दैनिक पूजन एवं व्यवस्थाओं के प्रबंध के लिए नियमावली एएसआई के दिल्ली मुख्यालय से स्वीकृति के इंतजार में अटकी हुई है। उसके लिए कब तक इंतजार करना होगा, इस बारे में एएसआई के जिम्मेदार अधिकारी अभी कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं हैं।

दरअसल, भोजशाला के लिए समृद्ध ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के रूप में संवारे जाने की श्रद्धालुओं को जो उम्मीद है, वह फिलहाल धरातल पर न उतरने से धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों में नाराजगी है।

हाई कोर्ट ने दिए थे स्पष्ट निर्देश

बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गत 15 मई को भोजशाला मामले में ऐतिहासिक निर्णय देने के साथ ही निर्देश दिया था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) और सरकार मिलकर परिसर में धार्मिक गतिविधियों और संस्कृत शिक्षा के संचालन की रूपरेखा तैयार करें। श्रद्धालुओं को निर्बाध रूप से परिसर को खोलने के साथ ही दैनिक प्रबंध के लिए नियमावली बनाई जाए, लेकिन भोजशाला को श्रद्धालुओं के लिए खोल तो दिया गया, लेकिन अन्य मंदिरों की तरह यहां प्रबंधन के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

गाइडलाइन नहीं होने से श्रद्धालु परेशान

भोजशाला को वाग्देवी मंदिर घोषित किए जाने का संघर्ष करने वाली संगठन हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के जिलाध्यक्ष आशीष गोयल का कहना है कि मंदिर में प्रवेश और पूजन के समय को लेकर कोई औपचारिक गाइडलाइन जारी नहीं किए जाने से श्रद्धालुओं को असुविधा हो रही है। संबंधित अधिकारियों से नई व्यवस्था के बारे में बात की तो उन्होंने बताया गया कि एएसआई  के भोपाल कार्यालय ने गाइडलाइन बनाकर दिल्ली स्थित मुख्यालय भेज दी है। वहां से स्वीकृति मिलना बाकी है।

सरस्वती लोक की कार्ययोजना में भी विलंब

बता दें कि कुछ समय पहले ही धार पहुंचकर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भोजशाला परिसर में उज्जैन के श्री महाकाल महालोक की तर्ज पर ‘सरस्वती लोक’ विकसित करने की घोषणा की थी। शासन और प्रशासन को इसकी कार्ययोजना तैयार करनी है, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत भी नहीं हो सकी है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

इस बीच, हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली मस्जिद पक्ष की याचिका पर 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की भी प्रतीक्षा है। यदि शीर्ष अदालत से कोई अंतरिम आदेश नहीं आता है तो हाई कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन और नई व्यवस्था को लेकर आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

जिला प्रशासन से मिलकर गाइडलाइन तैयार कर ली गई है। प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। जल्द ही स्वीकृति प्राप्त हो जाएगी।
-प्रशांत पाटणकर, जिला संरक्षक, एएसआई, मांडू

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