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पंजाब

फगवाड़ा की लवली यूनिवर्सिटी में एसआईटी को मिला रेप का कोई सबूत नहीं

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में 27 सितंबर को एक छात्रा के साथ बलात्कार के आरोपों की जांच कर रहे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को कथित तौर पर दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है।

जांच के बाद, पंजाब पुलिस ने 30 अक्टूबर को फगवाड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) हर्षवीर सिंह संधू की अदालत में मामले में रद्द करने की रिपोर्ट दायर की।

एफआईआर को अभी तक औपचारिक रूप से बंद नहीं किया गया है, क्योंकि रद्दीकरण रिपोर्ट अदालत की मंजूरी का इंतजार कर रही है। मामले में आगे के घटनाक्रम की प्रतीक्षा की जा रही है।

बलात्कार के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क गई थी, जिसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। प्रारंभिक जांच के दौरान घटना असत्यापित रही, न तो कथित पीड़ित और न ही आरोपी की पहचान स्थापित की गई।

फगवाड़ा के सतनामपुरा पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 64 के तहत एफआईआर (नंबर 162) दर्ज की गई थी। एलपीयू अधिकारियों ने कहा था कि परिसर में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।

जांच के दौरान, एसआईटी ने एक छात्र से भी पूछताछ की, जिसने कथित तौर पर रेडिट पर घटना के बारे में पोस्ट किया था। पोस्ट में दावा किया गया है कि गर्ल्स हॉस्टल नंबर 3 में एक यूनिवर्सिटी वर्कर ने एक छात्रा के साथ रेप किया था।

यह पोस्ट वायरल हो गई और परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बताया जा रहा है कि बाहरी लोगों के विश्वविद्यालय परिसर में घुसने के बाद आंदोलन बढ़ गया। पुलिस वाहनों को आग लगा दी गई, एलपीयू मॉल की दुकानों को कथित तौर पर लूट लिया गया और परिसर की संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें कई करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और तथ्यों को स्थापित करने के लिए छात्रावास के निवासियों, छात्रों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। हालांकि, जांच में कथित तौर पर बलात्कार के आरोपों का समर्थन करने वाला कोई सबूत नहीं मिला।

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