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मिथिला की ऐतिहासिक विरासत और दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण को केंद्र से आग्रह

जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद संजय कुमार झा ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर मिथिला से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री को दो पत्र सौंपकर मिथिला शोध संस्थान, दरभंगा को राष्ट्रीय स्तर के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ में शामिल करने तथा मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर ‘बलिराजगढ़’ के व्यापक उत्खनन के लिए कम-से-कम 10 वर्षों की परियोजना शुरू करने का आग्रह किया।

यह जानकारी उनके निजी सचिव ने एक विज्ञप्ति में दी है। संजय कुमार झा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री से मुलाकात काफी सकारात्मक रही और उन्होंने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

उन्होंने कहा कि मिथिला की समृद्ध ज्ञान परंपरा, साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत के सही रूप में सामने आने पर युवा पीढ़ी को उस पर गर्व होगा तथा देश-दुनिया में मिथिला का गौरव बढ़ेगा।

अपने पहले पत्र में उन्होंने मिथिला की समृद्ध पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, शोध, डिजिटलीकरण एवं पुनर्जीवन का मुद्दा उठाया। कहा कि मिथिला के महान विद्वानों द्वारा लिखित पांडुलिपियों में संरक्षित ज्ञान के सामने आने पर न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी लाभान्वित होंगी।

‘मिथिला शोध संस्थान’ को ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ में शामिल किए जाने से वहां संरक्षित दुर्लभ एवं ऐतिहासिक पांडुलिपियों को राष्ट्रीय पहचान मिल सकेगी। साथ ही मिथिला में बिखरी दुर्लभ, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक रूप से अमूल्य पांडुलिपियों का बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक सर्वेक्षण, संरक्षण और डिजिटलीकरण संभव हो सकेगा।

इससे भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, ज्योतिष, गणित, चिकित्सा एवं दर्शन जैसे विषयों पर शोध को नई दिशा मिलेगी। राज्य सरकार के सहयोग से मिथिला शोध संस्थान के बुनियादी ढांचे को पहले से मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ से जुड़ने के बाद यह संस्थान पांडुलिपि संरक्षण, ज्ञान परंपरा और उन्नत अनुसंधान के बड़े क्षेत्रीय केंद्र के रूप में उभरेगा।

यह पहल मिथिला की अनमोल बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

अपने दूसरे पत्र में उन्होंने मिथिला की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर ‘बलिराजगढ़’ के संरक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन का मुद्दा उठाया।

कहा कि मधुबनी जिले में स्थित बलिराजगढ़ मिथिला की प्राचीन सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिसका ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक है। यहां मिथिला का स्वर्णिम इतिहास दफन है।

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