Connect with us

देश

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना के डूब क्षेत्र को नुकसान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को जिम्मेदार ठहराने वाले एनजीटी के आदेश को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2017 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें श्री श्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को 2016 में विश्व संस्कृति महोत्सव के दौरान यमुना के डूब क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए पांच करोड़ रुपये देने का आदेश दिया गया था।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को पर्यावरण मुआवजे के लिए फाउंडेशन की ओर से जमा किए गए 5 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया।

दिसंबर 2017 में एनजीटी द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से जुड़े व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए, पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि यह साबित करने के लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है कि सांस्कृतिक उत्सव ने यमुना नदी के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाया है।

पीठ ने डीडीए को एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के डूब क्षेत्र के पुनर्वास की दिशा में काम जारी रखने का निर्देश दिया।

आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने 11 मार्च से 13 मार्च 2016 तक यहां विश्व संस्कृति महोत्सव का आयोजन किया था, जिसमें दुनिया भर से करीब 35 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। फाउंडेशन ने उक्त उत्सव के आयोजन के लिए यमुना के बाढ़ के मैदान पर निर्माण कार्य शुरू किया था।

यमुना जीवन अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा, पर्यावरण कार्यकर्ता आनंद आर्य और अन्य ने एनजीटी का रुख किया था, जिसने बाढ़ के मैदान को हुए नुकसान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को जिम्मेदार ठहराया था और उसे 5 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था।

एनजीटी ने यह भी निर्देश दिया था कि दिल्ली में यमुना के डूब क्षेत्र का इस्तेमाल ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

Instagram

Facebook

Janta Voice Times

Janta Voice Times All India News

Trending

Copyright © 2025 Janta Voice Times. * All Rights Reserved. *