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उत्तर प्रदेश

हमीरपुर जिला अस्पताल की बदहाल स्थिति पर उपमुख्यमंत्री से शिकायत, मरीजों को कानपुर रेफर करने की मजबूरी

हमीरपुर जिला अस्पताल की बदहाल स्थिति पर उपमुख्यमंत्री से शिकायत, मरीजों को कानपुर रेफर करने की मजबूरी

हमीरपुर।
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिला अस्पताल की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को लखनऊ स्थित आवास पर बृजेश पाठक से मुलाकात के दौरान जिला अस्पताल की गंभीर स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान स्थानीय भाजपा नेता राजीव शुक्ला ने अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं और चिकित्सकीय सुविधाओं की भारी कमी की ओर उपमुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

राजीव शुक्ला ने बताया कि हमीरपुर का जिला अस्पताल अब इलाज के बजाय रेफर सेंटर बनकर रह गया है। हालात ऐसे हैं कि मामूली चोट या सामान्य बीमारी के मामलों में भी मरीजों को तत्काल कानपुर भेज दिया जाता है। इससे न केवल मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने का खतरा भी बढ़ जाता है।

सर्जन डॉक्टरों की भारी कमी

भाजपा नेता ने उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया कि जिला अस्पताल में सर्जन डॉक्टरों की भारी कमी है। कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिसके कारण ऑपरेशन और गंभीर उपचार संभव नहीं हो पा रहा। परिणामस्वरूप, ऐसे मरीज जिन्हें यहीं इलाज मिल सकता है, उन्हें भी मजबूरी में कानपुर या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जिला अस्पताल को उन्नत बनाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन डॉक्टरों की नियुक्ति न होने से इन प्रयासों का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं

राजीव शुक्ला ने बताया कि जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों या कानपुर जाना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी

बैठक में जिले में बढ़ते आत्महत्या (सुसाइड) के मामलों का भी मुद्दा उठाया गया। राजीव शुक्ला ने बताया कि जिला अस्पताल में मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में मानसिक तनाव, अवसाद और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि समय पर काउंसलिंग और उपचार से कई जानें बचाई जा सकती हैं।

ICU तैयार, लेकिन शुरू नहीं हो सका

उन्होंने उपमुख्यमंत्री को यह भी बताया कि जिला अस्पताल में आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन डॉक्टरों और विशेषज्ञ स्टाफ की कमी के कारण यह अब तक शुरू नहीं हो सका। गंभीर मरीजों को ICU सुविधा न मिलने के कारण सीधे कानपुर रेफर किया जा रहा है, जिससे कई बार मरीज की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है।

स्थानीय इलाज से मिलेगी बड़ी राहत

राजीव शुक्ला ने कहा कि यदि जिला अस्पताल में आवश्यक डॉक्टरों की नियुक्ति कर दी जाए और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो हमीरपुर और आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे न केवल रेफर की संख्या कम होगी, बल्कि लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत होगा।

उपमुख्यमंत्री को सौंपा गया मांग पत्र

सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री को एक मांग पत्र भी सौंपा गया, जिसमें जिला अस्पताल में सर्जन, विशेषज्ञ डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, अल्ट्रासाउंड सुविधा और ICU संचालन की मांग की गई है। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार की उम्मीद

हमीरपुर जैसे पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्र वाले जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती बेहद जरूरी मानी जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उपमुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद जल्द ही जिला अस्पताल की स्थिति में सुधार होगा और मरीजों को बड़े शहरों की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

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