उत्तर प्रदेश
सरकारी जमीन पर कब्जों पर प्रहार: देवरिया की मजार, संभल के मकान और वाराणसी में बुलडोजर एक्शन
उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माण और सरकारी जमीन पर कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए ताबड़तोड़ बुलडोजर कार्रवाई की है। देवरिया, संभल और वाराणसी जिलों में एक ही दिन में हुई इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि नियमों की अनदेखी और अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

देवरिया जिले में प्रशासन ने एक अवैध रूप से बनी मजार को गिराने की कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, यह मजार बिना किसी वैध अनुमति के सरकारी भूमि पर बनाई गई थी। पहले से ही मामले की जांच चल रही थी और संबंधित पक्ष को नोटिस भी जारी किया गया था। तय समय में जवाब या वैध दस्तावेज पेश न किए जाने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाने का फैसला लिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
वहीं संभल जिले में सरकारी जमीन पर बने अवैध मकानों को निशाना बनाया गया। प्रशासन के मुताबिक, लंबे समय से इन मकानों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि ये निर्माण सरकारी भूमि पर बिना अनुमति के किए गए थे। इसके बाद राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बुलडोजर चलाकर कई मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते स्थिति नियंत्रण में रही।
इसी क्रम में वाराणसी के दलमंडी इलाके में भी प्रशासन ने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। यहां एक धार्मिक ढांचे और आसपास बने अतिक्रमण को हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि यह इलाका अत्यधिक भीड़भाड़ वाला है और अवैध निर्माणों के कारण यातायात व सुरक्षा से जुड़े खतरे बढ़ रहे थे। कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों को सूचना दी गई थी और आवश्यक तैयारी के बाद मशीनें उतारी गईं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी विशेष वर्ग या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी तरह से कानून के तहत चलाया जा रहा है। जिन निर्माणों के पास वैध कागजात नहीं हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का यह भी कहना है कि भविष्य में भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों पर इसी तरह सख्ती बरती जाएगी।
इस बुलडोजर एक्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे कानून का सख्त पालन बता रहे हैं, तो कुछ इसे संवेदनशील मुद्दा मानकर सावधानी की जरूरत जता रहे हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि हर कदम कानूनी प्रक्रिया के तहत और पूरी पारदर्शिता के साथ उठाया गया है।
कुल मिलाकर, देवरिया से लेकर संभल और वाराणसी तक हुई यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाती है। संदेश साफ है—सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा या नियमों के खिलाफ निर्माण करने वालों को अब किसी भी तरह की राहत नहीं मिलने वाली।

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