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UP Tak Ground Report: जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर आदेश के बीच हजारों छात्र परेशान, बोले- ‘हमारी पढ़ाई और भविष्य बचाइए’
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई के आदेश सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच यूपी Tak ने यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचकर अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में पढ़ने वाले छात्रों से बातचीत की. इस दौरान छात्रों ने अपनी पढ़ाई, फीस, यूनिवर्सिटी के माहौल और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने की मांग की है. छात्रों का कहना है कि अगर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई होती है तो हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा और कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाएगा.
‘यहां की पढ़ाई बहुत अच्छी है, ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाए’
मदर टेरेसा इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस के प्रथम वर्ष के छात्र मोहम्मद तहसीन ने बताया कि वह ऑडियो टेक्नीशियन का डिप्लोमा कर रहे हैं. उनके अनुसार उनकी फैकल्टी में करीब 120 छात्र हैं और यहां पैरामेडिकल से जुड़े कई कोर्स संचालित होते हैं, जिनमें ऑप्टोमेट्री, फिजियोथेरेपी समेत अन्य पाठ्यक्रम शामिल हैं.
तहसीन के मुताबिक रामपुर क्षेत्र में इतनी अच्छी पढ़ाई कहीं और नहीं होती. इसी वजह से छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से मांग कर रहे हैं कि यूनिवर्सिटी को ध्वस्त करने का आदेश वापस लिया जाए. उनका कहना था कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो शिक्षा संस्थानों के साथ इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
छात्रों ने बताई फीस में मिलने वाली रियायत
मोहम्मद तहसीन ने बताया कि यूनिवर्सिटी में छात्रों को 12वीं के अंकों के आधार पर फीस में छूट दी जाती है. उन्होंने कहा कि उनकी प्रथम वर्ष की फीस 73 हजार रुपये थी, लेकिन उन्हें केवल 3 हजार रुपये जमा करने पड़े. उन्होंने बताया कि अलग-अलग श्रेणियों के छात्रों को अलग-अलग रियायत मिलती है. जिन छात्रों के माता-पिता नहीं हैं या सिंगल पैरेंट हैं, उन्हें भी फीस में विशेष छूट दी जाती है.
‘बी-फार्मा में करीब एक हजार छात्र पढ़ रहे हैं’
बी-फार्मा के छात्र मोहम्मद हाशिम ने बताया कि उनकी फैकल्टी में लगभग एक हजार छात्र पढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि पढ़ाई अच्छी होती है और उनके पिता दुकान चलाते हैं, उसी से उनकी फीस जमा होती है. उन्होंने बताया कि उन्हें भी प्रतिशत के आधार पर फीस में छूट मिली है. साथ ही जिन छात्रों के माता-पिता नहीं हैं, उन्हें सौ प्रतिशत फीस माफ करने की व्यवस्था भी है.
बीटेक छात्र बोले- ‘टीचर हर समय सहयोग करते हैं’
बिहार से पढ़ने आए छात्र ने जताई चिंता
एलएलबी के छात्र यूसुफ अख्तर ने बताया कि वह बिहार से पढ़ने के लिए रामपुर आए हैं. उनका पहला वर्ष पूरा हो चुका है और दूसरे वर्ष की शुरुआत होने वाली थी, तभी उन्हें यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई की खबर मिली. उन्होंने कहा कि उनके पिता किसान हैं और खेती करके उन्हें पढ़ा रहे हैं. दूसरी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना उनके परिवार के बजट से बाहर है. उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों के छात्रों को भी 25 प्रतिशत फीस में छूट मिलती है. उनका कहना था कि यूनिवर्सिटी का माहौल अच्छा है और वह चाहते हैं कि उनकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रहे.
बीबीए छात्र बोले- ‘इतनी अच्छी यूनिवर्सिटी कहीं नहीं देखी’
बीबीए के छात्र मोहम्मद साद ने बताया कि उनके पिता किसान हैं और खेती से उनकी पढ़ाई का खर्च चलता है.
उन्होंने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई होती है तो उनका एक साल बर्बाद हो जाएगा. उन्होंने यूनिवर्सिटी की इमारत, क्लासरूम और पढ़ाई की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लेक्चर इतने अच्छे होते हैं कि परीक्षा की तैयारी के लिए अलग से ज्यादा पढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ती.
साद ने बताया कि ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद छात्र लगातार धरने पर बैठे हैं और सरकार से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
‘ध्वस्तीकरण की खबर सुनकर पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया था’
मोहम्मद तहसीन ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार यूनिवर्सिटी को तोड़े जाने की खबर सुनी तो उन्हें लगा कि अगर ऐसा हुआ तो वह अपनी पढ़ाई ही छोड़ देंगे. उन्होंने कहा कि यही उनकी आखिरी उम्मीद थी और इसके बाद वह कुछ नहीं कर पाएंगे.
‘जैसे किसी के घर को तोड़ने का नोटिस आ जाए’
एलएलबी के छात्र अनुराग ने कहा कि अगर किसी के घर को तोड़ने का नोटिस आए तो उसकी जैसी स्थिति होगी, वैसी ही स्थिति छात्रों की है.उन्होंने कहा कि अगर यूनिवर्सिटी टूटती है तो दो-दो साल की पढ़ाई और माता-पिता का लगाया पैसा दोनों बर्बाद हो जाएंगे. उनका कहना था कि हर साल प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कोई न कोई विवाद खड़ा हो जाता है, जिससे नए छात्रों के मन में डर बैठ जाता है. उन्होंने सरकार से ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लेने की अपील की.
‘मेरे छोटे भाई ने भी यहां एडमिशन से मना कर दिया’
बीए-एलएलबी के चौथे वर्ष के छात्र अब्दुल सोहेल ने बताया कि वह अपने छोटे भाई का भी इसी यूनिवर्सिटी में दाखिला कराना चाहते थे. लेकिन ध्वस्तीकरण के आदेश की खबर के बाद परिवार ने मना कर दिया. उनके अनुसार अब उनका भाई भी यहां प्रवेश नहीं लेना चाहता क्योंकि उसे अपने भविष्य की चिंता है. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यहां हजारों छात्रों का भविष्य जुड़ा है.
‘हमें क्लास में होना चाहिए था, धरने पर नहीं’
एलएलबी कर रहे राशिद अली ने कहा कि जब उन्होंने ध्वस्तीकरण का आदेश सुना तो उन्हें गहरा झटका लगा. उन्होंने कहा कि इस समय उन्हें कक्षा में पढ़ाई करनी चाहिए थी, लेकिन वह धरने पर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि छात्रों के मन की स्थिति को शब्दों में बयान करना मुश्किल है.
कम संख्या में दिख रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर भी दिया जवाब
छात्रों से जब पूछा गया कि यूनिवर्सिटी में तीन से चार हजार छात्र बताए जा रहे हैं, जबकि धरने पर कम छात्र दिखाई दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि इस समय सेमेस्टर परीक्षाओं के बाद छुट्टियां चल रही हैं.
उनके अनुसार बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली, हरियाणा, बिहार समेत दूसरे राज्यों में अपने घर गए हुए हैं. कई गरीब परिवारों के छात्र छुट्टियों के दौरान नौकरी भी कर रहे हैं.
छात्रों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुई लाठीचार्ज की तस्वीरें देखी हैं, जिससे कई छात्र विरोध प्रदर्शन में आने से डर रहे हैं.
‘यह शिक्षा का मंदिर है’
बी-फार्मा अंतिम वर्ष के छात्र आलिम ने कहा कि जब उन्हें 38 इमारतों पर बुलडोजर चलने की खबर मिली तो उनके भीतर सन्नाटा छा गया. उन्होंने कहा कि उनके लिए यह यूनिवर्सिटी शिक्षा का मंदिर है और वह चाहते हैं कि सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार करे.
किसानों के बेटों ने भी रखी अपनी बात
बीए-एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र दिनेश कुमार ने बताया कि वह रामपुर के एक छोटे गांव से आते हैं और उनके पिता किसान हैं.
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें दूसरी जगह पढ़ने जाना पड़े तो समय और पैसा दोनों अधिक खर्च होंगे. उनके अनुसार यह यूनिवर्सिटी छोटे और सामान्य परिवारों के बच्चों के लिए बड़ी सुविधा है.
उन्होंने कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश सुनने के बाद उन्हें लगा कि उनके भविष्य पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. उन्होंने सरकार से आदेश तत्काल वापस लेने की अपील की.
छात्रों की एक ही मांग- ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाए
यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों के छात्रों की बातों में एक बात समान दिखाई दी. सभी छात्रों ने कहा कि उनका भविष्य, पढ़ाई और करियर इस यूनिवर्सिटी से जुड़ा है. छात्रों ने सरकार से अपील की कि ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया जाए ताकि उनकी पढ़ाई पहले की तरह जारी रह सके और उन्हें भविष्य को लेकर असमंजस का सामना न करना पड़े.
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