राज्य
92 हजार करोड़ खर्च, पर हिसाब नदारद: CAG की रिपोर्ट में खुली बिहार के सरकारी विभागों की पोल
सरकार के विभाग खर्च तो खूब कर रहे, लेकिन समय से उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) जमा नहीं कर रहे। बार-बार के तगादे के बावजूद हिसाब-किताब नहीं देने का ढर्रा-सा बनता जा रहा है। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) ने इससे विधान मंडल को अवगत करा दिया है।
गुरुवार को प्रस्तुत कैग की रिपोर्ट बता रही कि 31 मार्च, 2025 तक 92132.75 करोड़ रुपये के यूसी नहीं मिले थे। इनमें से आधे से अधिक का हिसाब तो मात्र दो विभाग (पंचायती राज और शिक्षा विभाग) दबाए बैठे हैं।
इसके साथ 10361.74 करोड़ रुपये का सार आकस्मिक विपत्र (डीसी बिल) भी नहीं सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष (अप्रैल 2024) पहले तक 70877.61 करोड़ के यूसी लंबित थे।
यूसी और डीसी बिल को लेकर कैग ने बजट सत्र में ही सरकार को आगाह कर दिया था। उसके बाद लोक लेखा समिति का दायित्व बनता था कि वह विभागों को तलब कर हिसाब-किताब ले। कुछ हद तक पहल भी हुई, लेकिन राजकोषीय और वित्तीय अधिनियमों के अनुरूप विभागों के लेखा का अंतिम संधारण नहीं हुआ।
उल्लेखनीय है कि कैग की रिपोर्ट विधानसभा से लोक लेखा समिति के समक्ष जाती है। समिति उसका परीक्षण कर विधानसभा को अपनी रिपोर्ट सौंपती है। उस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई करती है।
यूसी हेतु 18 और डीसी हेतु छह माह का समय:
यूसी वे अनिवार्य दस्तावेज होते हैं, जिसके जरिये विभाग बताते हैं कि उन्हें मिली अनुदान राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए किया गया है। नियमानुसार 18 माह के भीतर यूसी जमा होना चाहिए। इसके लंबित रहने पर धन के गबन, विचलन या धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ता है।
बिहार कोषागार संहिता के अनुसार, आहरण व संवितरण अधिकारी (डीडीओ) द्वारा जिस तिथि को कोषागार से संक्षिप्त आकस्मिक विपत्र (एसी बिल) के जरिये धन की निकासी हुई, उससे छह माह के भीतर अंतिम व्यय के समर्थन मेंं सभी वाउचरों के साथ डीसी बिल प्रस्तुत करना होता है।
लंबित यूसी
| अवधि | यूसी की संख्या | राशि |
|---|---|---|
| 2019-20 से पूर्व | 3505 | 21515.36 |
| 2019-20 | 9241 | 6482.14 |
| 2020-21 | 15544 | 7433.46 |
| 2021-22 | 12695 | 13374.03 |
| 2022-23 | 15538 | 23046.38 |
| 2023-24 | 6109 | 20271.38 |
यूसी दबाने वाले शीर्ष पांच विभाग
- पंचायती राज : 32383.08
- शिक्षा : 19097.00
- नगर विकास : 17876.32
- ग्रामीण विकास : 6418.60
- स्वास्थ्य : 3036.86
सर्वाधिक डीसी दबाने वाले पांच विभाग:
कुल बकाया डीसी में शिक्षा, ग्रामीण कार्य और उद्योग विभाग को आधे से अधिक राशि का हिसाब देना है। शिक्षा विभाग को 1932.82, ग्रामीण कार्य को 1649.44, उद्योग को 1555.04, गृह को 794.16 और स्वास्थ्य विभाग के पास 468.57 करोड़ का डीसी लंबित है।
-
देश10 months ago‘न्याय के साथ विकास’ से ‘Ease of Living’ तक: बिहार को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाने का संकल्प – मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
-
देश9 months ago2027 चुनाव से पहले पंजाब सीएम भगवंत मान का बड़ा राजनीतिक दांव
-
विदेश10 months agoफर्जी डिग्री रैकेट पर ऑस्ट्रेलिया में हंगामा, भारतीय कार्रवाई का हवाला देकर सीनेटर मैल्कम रॉबर्ट्स ने छात्र वीज़ा सिस्टम पर उठाए सवाल
-
उत्तर प्रदेश10 months agoपूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की जेल में बिगड़ी तबीयत, देवरिया से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर
-
बिहार-झारखंड10 months agoखाद कालाबाजारी पर बिहार सरकार का सख्त एक्शन, ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू: कृषि मंत्री
-
देश10 months agoराष्ट्रपति द्रौपादी मुर्मु का अमृतसर साहिब में भव्य स्वागत, CM भगवंत मान ने सिख मर्यादा व संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
-
पंजाब9 months agoमीडिया पर दबाव के आरोप, पंजाब की राजनीति में बढ़ा विवाद
-
दिल्ली10 months agoपंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज अमित शाह से करेंगे मुलाकात, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

