उत्तर प्रदेश
प्रदेशभर में शुरू हुआ ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0’, 8 दिन तक मिलेंगे नौकरी और स्वरोजगार के अवसर
प्रदेशभर में शुरू हुआ ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0’, 8 दिन तक मिलेंगे नौकरी और स्वरोजगार के अवसर
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में 6 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक राज्यव्यापी विशेष अभियान “दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0” की शुरुआत की गई है। इस आठ दिवसीय अभियान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल नौकरी दिलाना ही नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़कर सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।
यह अभियान उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के सभी जनपदों में एक साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह पहल दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी और हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।
आत्मनिर्भर दिव्यांगजन सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार यह दोहराते रहे हैं कि समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0 उसी सोच का विस्तार है, जिसके माध्यम से दिव्यांगजनों को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता का अवसर दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य है कि दिव्यांगजन केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहें, बल्कि अपनी मेहनत और कौशल के बल पर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन करें।
प्रशिक्षित दिव्यांगजनों को मिलेगी प्राथमिकता
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान के तहत उन दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन या राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षित और इच्छुक दिव्यांगजन, जो वर्तमान में जनपदों में उपलब्ध हैं, उन्हें सीधे रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, अन्य इच्छुक दिव्यांगजन भी जनपद स्तर पर पंजीकरण कर इस अभियान का लाभ उठा सकेंगे।
औद्योगिक इकाइयों में सेवायोजन पर विशेष फोकस
दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0 के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित औद्योगिक इकाइयों, निजी कंपनियों और संस्थानों में उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार दिव्यांगजनों का सेवायोजन (प्लेसमेंट) कराया जाएगा।
इसके लिए जिला प्रशासन, उद्योग विभाग और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के बीच समन्वय तंत्र स्थापित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन अपनी योग्यता और क्षमता के अनुरूप रोजगार प्राप्त कर सकें।
स्वरोजगार योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा
इस अभियान में स्वरोजगार को भी विशेष महत्व दिया गया है। जिन दिव्यांगजनों की रुचि नौकरी करने के बजाय अपना स्वयं का व्यवसाय या उद्यम शुरू करने में है, उन्हें एमएसएमई विभाग, जिला उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र और अन्य संबंधित विभागों की योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
इन योजनाओं के तहत दिव्यांगजनों को
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बैंक ऋण
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सब्सिडी
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उपकरण सहायता
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उद्यम स्थापना मार्गदर्शन
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प्रशिक्षण एवं विपणन सहायता
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार चाहती है कि दिव्यांगजन केवल रोजगार पाने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं उद्यमी बनकर अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम हों।
जनपद स्तर पर समिति करेगी अभियान का संचालन
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि प्रत्येक जनपद में इस अभियान का संचालन मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा।
इस समिति में शामिल होंगे:
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जिला उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र के प्रतिनिधि
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जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी
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जिला रोजगार सहायता अधिकारी
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उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के जिला समन्वयक
निर्धारित अवधि के दौरान राजकीय ITI को केंद्र बनाकर सेवायोजन शिविर, परामर्श सत्र, दस्तावेज सत्यापन, पंजीकरण और स्वरोजगार मार्गदर्शन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
रोजगार संगम पोर्टल से भी मिलेगा लाभ
इस अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकृत दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा।
जिला रोजगार सहायता अधिकारी के माध्यम से ऐसे पंजीकृत उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार नियोजित किया जाएगा। इसके साथ ही जनपद स्तर पर इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन इसकी जानकारी प्राप्त कर सकें।
जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा
सरकार ने स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों, प्रशिक्षण संस्थानों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी पात्र दिव्यांगजन इस अवसर से वंचित न रह जाए।
टॉप-5 जनपदों को मिलेगा विशेष सम्मान
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने विशेष पुरस्कार व्यवस्था भी की है। जो जनपद सर्वाधिक संख्या में दिव्यांगजनों को सेवायोजन और स्वरोजगार से जोड़ेंगे, उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
प्रदेश के शीर्ष 5 जनपदों के जिलाधिकारियों और उनकी टीम को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए सभी जनपदों से 13 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे तक सेवायोजित दिव्यांगजनों की संख्या, नियुक्ति पत्रों की प्रतियां और स्वरोजगार से संबंधित प्रमाण मांगे गए हैं।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0 उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत पहल है। इससे न केवल दिव्यांगजनों को रोजगार मिलेगा, बल्कि समाज में उनकी भूमिका और आत्मसम्मान भी मजबूत होगा।
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