मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू: हंगामे, उम्मीदों और नई घोषणाओं के बीच सियासी हलचल तेज
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू: हंगामे, उम्मीदों और नई घोषणाओं के बीच सियासी हलचल तेज
भोपाल | 16 फरवरी 2026
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मध्य प्रदेश की सियासत आज एक अहम मोड़ पर पहुंच गई, जब राजधानी भोपाल में Madhya Pradesh Legislative Assembly का बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया। यह सत्र 6 मार्च 2026 तक चलेगा और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विकास की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
सत्र की शुरुआत पारंपरिक औपचारिकताओं के साथ हुई, लेकिन पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे तेवर देखने को मिले। सदन के भीतर जहां सरकार आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष राज्य की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
बजट से जुड़ी उम्मीदें और चुनौतियाँ
इस बार का बजट कई मायनों में खास माना जा रहा है। एक ओर राज्य सरकार विकास कार्यों को गति देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सामाजिक योजनाओं के विस्तार की बात कर रही है, तो दूसरी ओर आर्थिक संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
वित्त विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले बजट में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और सिंचाई परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रावधान कर सकती है। साथ ही शहरी विकास और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को भी गति देने की योजना है।
सदन में गरमाया माहौल
सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और सरकार राजस्व संग्रह के मोर्चे पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रही है। उन्होंने किसानों के कर्ज, युवाओं की बेरोजगारी और बिजली दरों में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों को उठाया।
सत्ता पक्ष ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था स्थिर है और विकास दर में लगातार सुधार हो रहा है। सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में निवेश और उद्योगों के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र में तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि बजट वर्ष चुनावी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में हर दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करेगा।
आम जनता की नजरें सदन पर
भोपाल की सड़कों से लेकर गांवों के चौपाल तक, इस बजट सत्र को लेकर चर्चा है। किसान जानना चाहते हैं कि समर्थन मूल्य और सिंचाई योजनाओं में क्या बदलाव होंगे। युवा उम्मीद कर रहे हैं कि सरकारी नौकरियों और कौशल विकास योजनाओं में नए अवसर मिलेंगे। महिलाएं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की राह देख रही हैं।
व्यापारी वर्ग भी कर ढांचे में संभावित बदलावों पर नजर बनाए हुए है। छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय रोजगार सृजित हो।
मुख्यमंत्री की रणनीति
राज्य के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने सत्र शुरू होने से पहले मंत्रिमंडल और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर प्राथमिकताओं पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस बार “समावेशी विकास” की थीम पर जोर दे सकती है।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर भी ध्यान देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की योजना पर भी चर्चा हो सकती है।
संभावित प्रमुख घोषणाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बजट में निम्नलिखित क्षेत्रों पर जोर देखने को मिल सकता है:
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कृषि और सिंचाई परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त आवंटन
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महिला एवं बाल विकास योजनाओं का विस्तार
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युवाओं के लिए स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाएं
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स्वास्थ्य सेवाओं में जिला अस्पतालों का उन्नयन
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सड़क और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना
हालांकि इन घोषणाओं की औपचारिक पुष्टि बजट पेश होने के बाद ही होगी।
विपक्ष की रणनीति
विपक्ष इस सत्र को सरकार की नीतियों की समीक्षा का अवसर मान रहा है। वे आर्थिक आंकड़ों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की मांग कर सकते हैं। यदि उनकी मांगों को पर्याप्त समय नहीं मिला तो सदन में हंगामा और कार्यवाही स्थगित होने जैसी स्थिति भी बन सकती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बजट सत्र अक्सर केवल वित्तीय दस्तावेज पेश करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी बन जाता है।
आगे क्या?
अगले कुछ दिनों में बजट पेश किया जाएगा, जिसके बाद उस पर विस्तृत चर्चा होगी। सदन में संशोधन प्रस्ताव, बहस और मतदान की प्रक्रिया चलेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार अपने वादों को कितनी मजबूती से पेश करती है और विपक्ष किस तरह जवाबी रणनीति अपनाता है।
मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए यह सत्र केवल राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि उनके भविष्य की योजनाओं और विकास की दिशा तय करने वाला मंच है।
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