मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में बड़ा फर्जीवाड़ा: सागर में मध्य प्रदेश में 378 टन मक्के के साथ गोदाम भी गायब, चार पर एफआईआर
मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी ब्लॉक से एक वेयरहाउस चोरी हो गया है। उसमें 378 टन मक्का रखा था, जिसे पिछले साल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। इस मक्के की कीमत 76 लाख 31 हजार रुपये है।
अब भरतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) भोपाल के अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने इस खरीदी और प्रमाणन की प्रक्रिया से जुड़े चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है।
दरअसल, देवरी की फूड गार्ड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) ने एनसीसीएफ के पोर्टल पर 27 किसानों से मक्का खरीदी दर्शाई।
इनमें 17 किसानों के नाम पर 3430 क्विंटल मक्का (378 टन) की राशि करीब 76.31 लाख रुपए एनसीसीएफ मुख्यालय से सीधे उनके खातों में भेजी गई। वहीं 10 किसानों के नाम पर करीब 34.84 लाख रुपए का भुगतान माल का सत्यापन नहीं होने के कारण रोक दिया गया था।
जुलाई 2025 में एनसीसीएफ अधिकारियों ने देवरी पहुंचकर खरीदे गए मक्के का भौतिक सत्यापन किया तो फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
दस्तावेजों में जिस शांडिल्य वेयरहाउस में मक्का का स्टॉक बताया गया था, मौके पर न तो वेयरहाउस मिला और न ही मक्का का स्टाक।
मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन से भी इस नाम के वेयरहाउस का पंजीयन नहीं मिला।
इस मामले में एनसीसीएफ की मैनेजर अर्पणा सिंह द्वारा शिकायती आवेदन दिया था।पुलिस की जांच में सामने आया कि फूड गार्ड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्ट मनीष पटेल ने अपने ही मकान को वेयरहाउस बताकर कंपनी के नाम किरायानामा तैयार कर लिया।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी ब्लॉक से एक वेयरहाउस चोरी हो गया है। उसमें 378 टन मक्का रखा था, जिसे पिछले साल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था। इस मक्के की कीमत 76 लाख 31 हजार रुपये है।
अब भरतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (एनसीसीएफ) भोपाल के अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने इस खरीदी और प्रमाणन की प्रक्रिया से जुड़े चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है।
दरअसल, देवरी की फूड गार्ड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) ने एनसीसीएफ के पोर्टल पर 27 किसानों से मक्का खरीदी दर्शाई।
इनमें 17 किसानों के नाम पर 3430 क्विंटल मक्का (378 टन) की राशि करीब 76.31 लाख रुपए एनसीसीएफ मुख्यालय से सीधे उनके खातों में भेजी गई। वहीं 10 किसानों के नाम पर करीब 34.84 लाख रुपए का भुगतान माल का सत्यापन नहीं होने के कारण रोक दिया गया था।
जुलाई 2025 में एनसीसीएफ अधिकारियों ने देवरी पहुंचकर खरीदे गए मक्के का भौतिक सत्यापन किया तो फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
दस्तावेजों में जिस शांडिल्य वेयरहाउस में मक्का का स्टॉक बताया गया था, मौके पर न तो वेयरहाउस मिला और न ही मक्का का स्टाक।
मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन से भी इस नाम के वेयरहाउस का पंजीयन नहीं मिला।
इस मामले में एनसीसीएफ की मैनेजर अर्पणा सिंह द्वारा शिकायती आवेदन दिया था।पुलिस की जांच में सामने आया कि फूड गार्ड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्ट मनीष पटेल ने अपने ही मकान को वेयरहाउस बताकर कंपनी के नाम किरायानामा तैयार कर लिया।
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