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आरबीआई ने रुपये के लिए किसी भी कीमत या स्तर को लक्षित नहीं किया है: गवर्नर संजय मल्होत्रा

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये के लिए किसी भी कीमत या स्तर को लक्षित नहीं किया है, लेकिन विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित स्थिति सुनिश्चित करने के लिए सट्टा गतिविधियों और अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करना जारी रखेगा।

नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में बोलते हुए, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टा गतिविधियों और अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने में संकोच नहीं किया है, इस बात पर जोर देते हुए कि शीर्ष बैंक का मुख्य उद्देश्य व्यवधानों को रोकना और व्यवस्थित बाजार की स्थिति सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, ‘हम रुपये के लिए किसी कीमत या स्तर को लक्षित नहीं करते हैं, लेकिन साथ ही हमारा प्रयास रहा है कि हम विदेशी मुद्रा बाजारों में व्यवस्थित बाजार की स्थिति सुनिश्चित करें और इसलिए हमने संकोच नहीं किया है।

मल्होत्रा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, पश्चिम एशिया संघर्ष और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं ने केंद्रीय बैंकों के काम को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है, हालांकि उनकी मौलिक जिम्मेदारियां अपरिवर्तित हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का स्तर ऊंचा है। यह न केवल कच्चा है, यहां तक कि कमोडिटी की कीमतें भी अधिक हैं। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर वृद्धि दर कम है, आईएमएफ के अनुसार इस वर्ष के लिए 3.1% रहने का अनुमान है।

मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि कुछ संस्थानों के लिए विकास के उद्देश्यों और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता के साथ-साथ मूल्य स्थिरता केंद्रीय बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘वृद्धि दर कम है, लेकिन वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति अधिक है और इससे केंद्रीय बैंकर की भूमिका अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। एक केंद्रीय बैंकर की भूमिका मुख्य रूप से दुनिया भर में नंबर एक है, बिना किसी अपवाद के, मूल्य स्थिरता, कुछ केंद्रीय बैंकों के लिए दोहरे जनादेश के साथ, जो विकास और वित्तीय स्थिरता अन्य समान रूप से महत्वपूर्ण जनादेश है।

मल्होत्रा ने कहा कि जापान और स्वीडन सहित कुछ देशों को छोड़कर दुनिया भर की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि की है, जहां मुद्रास्फीति अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

भारत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने फरवरी में अपेक्षाकृत अनुकूल शुरुआती परिस्थितियों के साथ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के दौर में प्रवेश किया। हालांकि, मुद्रास्फीति तब से लगातार बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण आपूर्ति पक्ष का दबाव है, जो 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई ने उभरती आर्थिक स्थितियों के जवाब में नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी।

उन्होंने कहा, ‘हम मूल्य स्थिरता, मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रयास करना जारी रखते हैं, यह हमारा लक्ष्य नंबर एक है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय स्थिरता हो।

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