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दरभंगा में प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ी, कम लागत में बंपर पैदावार संभव

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती योजना के तहत बड़े स्तर पर क्लस्टर बनाकर किसान खेती कर रहे हैं। जिले के 15 प्रखंडों में 50-50 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए गए हैं।

स्थानीय किसानों और कृषि सखियों का मानना है कि इससे रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा मिलने के साथ लागत कम हो रही है और मुनाफा बढ़ रहा है। जिले के 15 प्रखंडों में 750 हेक्टेयर भूमि पर राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती योजना चलाई जा रही है।

इसके तहत 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस योजना को गति देने के लिए जीविका दीदियों में से ‘कृषि सखियों’ को चुना गया है।

किसानों को खेतों में ही देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से ‘जीवामृत’, ‘बीजामृत’ और ‘घनजीवामृत’ जैसे प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

हायाघाट प्रखंड के पोराम पंचायत के मकसुदपुर गांव के युवा किसान सुनील कुमार साह क्लस्टर में सामूहिक रूप से हरी सब्जी परवल, भिंडी, नेनुआ और गोभी उगा रहे हैं।

जैविक और प्राकृतिक तरीके से खेती करने के कारण इन सब्जियों की मांग स्थानीय बाजारों में काफी अधिक है। साह प्रत्येक महीने 25 से 30 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।

जिले के अलग-अलग हिस्सों में महिला किसान, सबीना खातून, प्राकृतिक विधि से उन्नत सब्जियों की बंपर पैदावार कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

किसानों को किया जा रहा जागरूक

जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। विज्ञानियों का मानना है कि इस विधि से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बरकरार रहती है और बीमारियों का खतरा कम होता है।

प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक मुनाफे का शानदार विकल्प बन गई है। जिले के किरतपुर, कुशेश्वरस्थान और कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड को छोड़कर सभी 15 प्रखंडों में यह योजना चलाई जा रही है।

प्रत्येक प्रखंड में एक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती की जाएगी। इन क्लस्टरों में किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। प्रत्येक प्रखंड से 125 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकृत किया गया है।

यह योजना दो वर्षों के लिए है। एक किसान को एक एकड़ में प्राकृतिक खेती के लिए चुना गया है। प्रोत्साहन के तहत किसान को प्रत्येक वर्ष दो हजार रुपये दिए जाएंगे। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और रासायनिक खाद के उपयोग को कम करना है।
-डा. सिद्धार्थ, जिला कृषि पदाधिकारी, दरभंगा।

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