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मध्य प्रदेश

भोपाल: भोजशाला के गर्भगृह में चुपके से रखी गई वाग्देवी की मूर्ति, ASI ने हटाया

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित अति संवेदनशील भोजशाला परिसर में सुरक्षा को धता बताते हुए एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शनिवार को भोजशाला के गर्भगृह के अंदर देवी वाग्देवी की एक अष्टधातु की मूर्ति गुपचुप तरीके से स्थापित कर दी गई।

यह मूर्ति कथित तौर पर कई घंटों तक वहां रखी रही, जिसके बाद शनिवार शाम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों ने इसे वहां से हटा दिया।

सुरक्षा पर उठे सवाल

मूर्ति के पास फूल, अक्षत और अन्य पूजा सामग्री भी पाई गई, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वहां बाकायदा अनुष्ठान और पूजा की गई थी। यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले के कुछ ही सप्ताह बाद हुआ है, जिसमें भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया गया था।

इस घटना ने इस संरक्षित स्मारक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारी अभी तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि यह मूर्ति कौन लाया, इसे कब स्थापित किया गया और कई घंटों तक यह कृत्य सुरक्षाकर्मियों की नजरों से कैसे बचा रहा।

पुलिस ने नहीं दर्ज किया कोई मामला

भोजशाला की सुरक्षा व्यवस्था दो स्तरों पर बंटी हुई है। जहां पुलिस कर्मी स्मारक की बाउंड्री की रखवाली करते हैं, वहीं ASI के कर्मचारी आंतरिक परिसर की निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं।

इस बड़ी चूक के बावजूद, ASI के मुख्य पुरातत्वविद् प्रशांत पाटणकर ने मामले पर कुछ भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।

धार कोतवाली के एसएचओ दीपक सिंह चौहान ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया गया है। इसका कारण यह है कि भोजशाला परिसर के अंदर ले जाने की अनुमति प्राप्त वस्तुओं की सूची को लेकर ASI का कोई ठोस दिशा-निर्देश या नियम मौजूद नहीं है, जिसके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

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