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पंजाब

अकाल तख्त में पेशी: मुख्यमंत्री भगवंत मान का बड़ा बयान, 30 हजार पन्नों की शिकायतें कीं जमा

अमृतसर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आज सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हुए। इस दौरान उन्होंने धार्मिक मामलों से जुड़े विवादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए लगभग 30,000 पन्नों की शिकायतें और दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में कभी भी किसी धर्म, धार्मिक परंपरा या संस्था के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा —
“मैं सिख परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करता हूं। मेरे शब्दों को गलत संदर्भ में पेश किया गया है।”
धार्मिक संस्थाओं के प्रति सम्मान जताया
भगवंत मान ने कहा कि अकाल तख्त सिख समाज की आत्मा है और इसका सम्मान हर सिख के लिए सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह का भ्रम या विवाद यदि उनके बयान से उत्पन्न हुआ है, तो वह उसे स्पष्ट करने के लिए अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि राजनीति से ऊपर धर्म और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए।
30 हजार पन्नों के दस्तावेजों में क्या है?
मुख्यमंत्री द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों में:
उनके पुराने भाषणों के ट्रांसक्रिप्ट
मीडिया रिपोर्ट्स
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप्स
और संदर्भ से काटे गए बयान
शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके जरिए उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया।
राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल
मुख्यमंत्री की इस पेशी के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों की नजर अब अकाल तख्त के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में पंजाब की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।

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