Connect with us

मध्य प्रदेश

खंडवा में अतिक्रमण हटाने पहुंचे वन अमले पर हमला, महिलाओं की आड़ में बरसे तीर-पत्थर; आठ वनरक्षक घायल

खंडवा वन मंडल के गुड़ी वन परिक्षेत्र में रविवार सुबह वन विभाग की विशेष गश्ती टीम पर हुए हमले ने जंगलों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान की चुनौतियों को उजागर कर दिया। गुड़ी वन परिक्षेत्र के आमाखुजरी जंगल में रविवार सुबह अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की विशेष फ्लाइंग स्क्वाड पर अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में करीब आठ वनरक्षक घायल हो गए। किसी वनकर्मी का सिर फट गया तो किसी का कान कट गया, जबकि कुछ वनकर्मी मौके पर ही बेहोश हो गए।

सभी घायलों को जिला अस्पताल में लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। वन रेंजर नरेंद्र पटेल ने बताया कि गश्त कर रही टीम वनभूमि पर बुआई कर रहे अतिक्रमणकारियों को रोक रही थी, तभी उन्होंने महिलाओं को आगे कर तीर और गोफन (गुलेल) से हमला कर दिया।

महिलाओं को आगे कर किया हमला

वनकर्मियों के अनुसार, वर्ष 2025 में भर्ती 45 वनरक्षकों की विशेष फ्लाइंग स्क्वाड नियमित गश्त के तहत कक्ष संख्या- 748 और 749 में पहुंची थी। यहां वन भूमि पर बुआई की तैयारी कर रहे लोगों को रोकने के दौरान करीब 150 से अधिक लोगों ने टीम को घेर लिया।

घायल कर्मचारियों का आरोप है कि पहले महिलाओं को आगे कर कार्रवाई रोकने का प्रयास किया गया, फिर पीछे से तीर और गोफन (गुलेल) से पत्थर बरसाए गए। इसके बाद लाठियों से हमला कर दिया गया, जिससे वनकर्मियों को संभलने का मौका नहीं मिला।

हमले में आठ वन कर्मचारी घायल हुए हैं। उनके सिर, छाती और शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें आई हैं। बता दें कि आदिवासी बहुल गुड़ी रेंज में वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर पहले भी कई बार विवाद और हमले हो चुके हैं।

khn attack on forest team 8595472

सहायता में देरी का आरोप

घायल वन कर्मचारियों ने घटना के बाद राहत और बचाव व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हमले की सूचना देने के बावजूद उन्हें समय पर मदद नहीं मिली और वे करीब दो घंटे तक जंगल में घायल अवस्था में पड़े रहे।

कर्मचारियों का यह भी दावा है कि पास के क्षेत्र से एक अन्य वन दल मौके की ओर आया था, लेकिन जंगल के भीतर प्रवेश किए बिना वापस लौट गया।

डायल-112 की भूमिका पर भी उठे सवाल

घटना के बाद वन कर्मचारियों ने डायल-112 की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि पुलिस वाहन घटनास्थल तक पहुंचा, लेकिन घायल वनकर्मियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय अन्य घायलों को लेकर रवाना हो गया, जिससे उपचार में देरी हुई।

सुरक्षा बढ़ाने की मांग

हमले के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि जंगलों में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने वाले अमले को पर्याप्त सुरक्षा, अतिरिक्त पुलिस बल और आपातकालीन सहायता तंत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

वन कर्मचारियों ने हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और हमले से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी गई है।

Instagram

Facebook

Janta Voice Times

Janta Voice Times All India News

Trending

Copyright © 2025 Janta Voice Times. * All Rights Reserved. *