मध्य प्रदेश
MP में पदोन्नति में आरक्षण पर फिर छिड़ा विवाद, नियम से सहमत नहीं कर्मचारी; सपाक्स ने दी आंदोलन की चेतावनी
मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025 में बनाए गए पदोन्नति नियमों के तहत प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी के बीच सामान्य वर्ग के कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि सरकार उन नियमों को लागू करने जा रही है, जिनकी वैधता को लेकर मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
नए नियमों पर क्यों उठ रहे सवाल?
विवाद की जड़ पदोन्नति के उन प्रावधानों में है, जिनके तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को आरक्षित पदों के अलावा मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर भी पदोन्नति का अवसर दिया गया है।
सामान्य वर्ग के कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को उनके निर्धारित आरक्षण कोटे में ही पदोन्नति मिलनी चाहिए, जबकि अनारक्षित पदों पर सामान्य प्रतिस्पर्धा के आधार पर अवसर सुनिश्चित किए जाएं। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था से पदोन्नति की प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो रहा है।
2016 के फैसले की फिर चर्चा
गौरतलब है कि वर्ष 2002 के पदोन्नति नियमों में आरक्षण संबंधी प्रावधानों को लेकर उच्च न्यायालय ने 2016 में नियमों को निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी उस व्यवस्था के तहत पदोन्नत हुए अधिकारियों-कर्मचारियों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया।
जब 2025 में नए नियम तैयार किए गए, तब भी कर्मचारी संगठनों ने सरकार से आग्रह किया था कि पूर्व की विसंगतियों को दोहराने से बचा जाए। हालांकि लंबी चर्चा के बाद सरकार ने ऐसे प्रावधान बनाए, जिनमें आरक्षित वर्ग को मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर भी पदोन्नति का अवसर बरकरार रखा गया।
कर्मचारी संगठनों की आपत्ति
सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) का कहना है कि नई व्यवस्था से पूर्व में पदोन्नत कर्मचारियों को फिर लाभ मिलेगा, जबकि लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अन्य कर्मचारी पीछे रह जाएंगे।
संगठन का दावा है कि सरकार ने न्यायालय में यह आश्वासन दिया था कि अंतिम फैसला आने तक नियमों के तहत पदोन्नति नहीं की जाएगी। ऐसे में न्यायालय का अंतिम निर्णय आए बिना प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
भोपाल में आयोजित सपाक्स की केंद्रीय कार्यकारिणी बैठक में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई। संगठन के अध्यक्ष केपीएस तोमर ने कहा कि यदि सरकार न्यायालयीन स्थिति स्पष्ट हुए बिना पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाती है, तो इसका विरोध किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पूर्व में पदोन्नत कर्मचारियों की स्थिति की समीक्षा किए बिना नई पदोन्नतियां की गईं, तो संगठन प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
पदों के निर्धारण के लिए सोमवार को बैठक
उधर, पदोन्नति के लिए विभागों में पद किस तरह निर्धारित किए जाएं, इसे लेकर प्रशासन विभाग ने सोमवार को सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों की बैठक बुलाई है। इसमें नए नियमों के अनुसार इन्हें पद आरक्षित करने के फार्मूले के बारे में बताया जाएगा।
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