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पंजाब

पटियाला में गुरु रविदास जी पर सेमिनार आयोजित, हरपाल चीमा और मनीष सिसोदिया ने की शिरकत

पटियाला में गुरु रविदास जी पर सेमिनार आयोजित, हरपाल चीमा और मनीष सिसोदिया ने की शिरकत

पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी में श्री गुरु रविदास जी के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मुख्य रूप से शामिल हुए। सेमिनार में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के विचारों को समाज के सामने पुनः स्थापित करना और उनकी शिक्षाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का संदेश फैलाना था। सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने गुरु रविदास जी के जीवन संघर्ष, उनके आध्यात्मिक दर्शन और सामाजिक सुधार में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर हरपाल सिंह चीमा ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु रविदास जी ने समाज को जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर एक समान और न्यायपूर्ण व्यवस्था का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भी गुरु रविदास जी की शिक्षाएं अत्यंत प्रासंगिक हैं और हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता और सद्भाव को मजबूत करना चाहिए।

वहीं, मनीष सिसोदिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि गुरु रविदास जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गुरु साहिब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दें। सिसोदिया ने यह भी कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और गुरु रविदास जी के विचार इस दिशा में मार्गदर्शक हैं।

सेमिनार में विभिन्न विद्वानों ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिनमें गुरु रविदास जी के साहित्य, उनके भजन और सामाजिक संदेशों का गहन विश्लेषण किया गया। वक्ताओं ने बताया कि गुरु रविदास जी ने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की भावना को समाप्त करने और सभी को समान अधिकार देने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया और यह संकल्प लिया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से महान संतों और गुरुओं की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

यह सेमिनार न केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम रहा, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक मंच भी साबित हुआ, जहां से गुरु रविदास जी के संदेशों को अपनाने और उन्हें जीवन में उतारने की प्रेरणा मिली।

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