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बिहार-झारखंड

बिहार के सभी प्रखंडों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बड़ा ऐलान

बिहार के सभी प्रखंडों में खुलेंगे डिग्री कॉलेज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बड़ा ऐलान

‘सात निश्चय-3’ के तहत शिक्षा को नई दिशा, जुलाई 2026 से पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य

पटना।
बिहार में उच्च शिक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के सभी प्रखंडों (ब्लॉकों) में डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया है। इस निर्णय का उद्देश्य छात्रों, विशेषकर लड़कियों को उच्च शिक्षा तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूर-दराज के शहरों में न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ के चौथे निश्चय – उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य के तहत लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम बिहार के सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

213 प्रखंडों में पहले चरण में खुलेंगे डिग्री कॉलेज

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि वर्तमान में बिहार के कुल 534 प्रखंडों में से 213 प्रखंड ऐसे हैं, जहां अभी तक कोई भी अंगीभूत या संबद्ध डिग्री कॉलेज उपलब्ध नहीं है। इन प्रखंडों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों में जाना पड़ता है, जिससे विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि सरकार ने पहले चरण में इन सभी 213 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है और जुलाई 2026 तक इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

लड़कियों की शिक्षा को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से लड़कियों की शिक्षा को विशेष बढ़ावा मिलेगा। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को दूर स्थित कॉलेजों में भेजने में परिवार झिझकते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज खुलने से यह समस्या काफी हद तक दूर होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि लड़कियां सुरक्षित माहौल में, अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। इससे न केवल महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक बदलाव भी आएगा।

पुराने शिक्षण संस्थानों को बनाया जाएगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने बयान में यह भी बताया कि राज्य के पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत कुल 55 शिक्षण संस्थानों का चयन किया गया है।

इन संस्थानों में

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

  • उन्नत लैब और लाइब्रेरी

  • डिजिटल और तकनीकी सुविधाएं

  • और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम
    विकसित किए जाएंगे, ताकि छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक शिक्षा मिल सके।

अनुभवी शिक्षकों और पूर्व छात्रों से लिया जाएगा सुझाव

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि चयनित शिक्षण संस्थानों के अनुभवी शिक्षकों और पूर्व छात्र-छात्राओं से विमर्श कर सुझाव लिए जाएं। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की पुरानी गरिमा और शैक्षणिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से उनका उन्नयन किया जाए।

सीएम का मानना है कि शिक्षकों और छात्रों के अनुभवों को शामिल करने से संस्थानों को नई पहचान मिलेगी और वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

रोजगारपरक शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिग्री कॉलेजों की स्थापना और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के विकास से युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। आधुनिक पाठ्यक्रमों और स्किल-आधारित शिक्षा से छात्र सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नौकरी और स्वरोजगार के लिए भी तैयार होंगे।

उन्होंने कहा कि इससे बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की मजबूरी भी कम होगी।

राज्य के चहुंमुखी विकास में होगा सहयोग

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की नींव होती है। सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खुलने और प्रतिष्ठित संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बदलने से बिहार के चहुंमुखी विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि

“उच्च शिक्षा के विस्तार से न केवल मानव संसाधन मजबूत होगा, बल्कि सामाजिक समानता, आर्थिक प्रगति और नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।”

शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की दीर्घकालिक सोच

राज्य सरकार का यह निर्णय बताता है कि बिहार सरकार शिक्षा को लेकर दीर्घकालिक और दूरदर्शी नीति पर काम कर रही है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, हर स्तर पर बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है।

जनता और शिक्षाविदों ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री के इस ऐलान का शिक्षाविदों, छात्रों और अभिभावकों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी और शिक्षा के अवसरों में समानता आएगी।


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