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उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे राष्ट्रनायक रहे हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने काशी की पावन धरा पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ के शुभारंभ अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए इसे भारत के स्वाभिमान, नवजागरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह कार्यक्रम वाराणसी (काशी) में आयोजित किया गया, जो सदियों से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और परंपरा का केंद्र रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे राष्ट्रनायक रहे हैं, जिनकी गौरवगाथा आज भी समाज को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन न केवल हमारे गौरवशाली अतीत को जीवंत करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपने मूल्यों, आदर्शों और विरासत से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। उन्होंने इस पहल को एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति भी रही। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के स्वर्णिम युग के प्रतीक हैं और उनके जीवन पर आधारित यह महानाट्य निश्चित रूप से देशभर में सकारात्मक संदेश फैलाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता और सहयोग को भी मजबूत करते हैं।

कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके पराक्रम, न्यायप्रियता और जनकल्याणकारी नीतियों को भव्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय, संगीत और नृत्य के जरिए दर्शकों को प्राचीन भारत के उस गौरवशाली काल में पहुंचा दिया, जब विक्रमादित्य का शासन आदर्श शासन व्यवस्था का उदाहरण माना जाता था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और युवाओं ने भाग लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। काशी में हो रहे इस प्रकार के आयोजन उसी दिशा में एक मजबूत पहल हैं, जो भारत की प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

अंत में, उन्होंने आयोजकों को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई दी और आशा व्यक्त की कि ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ आने वाले समय में देशभर में सांस्कृतिक जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बनेगा।

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