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मुड़े पैरों के साथ जन्मे बच्चों के लिए वरदान बना क्लबफुट अभियान!; सुपौल में 7 बच्चे हुए स्वस्थ, हर मंगलवार मुफ्त इलाज

Supaul Clubfoot Treatment Free Clinic: जन्म से ही बच्चे के पैर यदि अंदर की ओर मुड़े हुए हों, तो यह किसी दैवीय प्रकोप, जादू-टोने या ग्रह दोष का फल नहीं, बल्कि एक जन्मजात शारीरिक विकृति है जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘क्लबफुट’ कहा जाता है। सही समय पर उचित डॉक्टरी देखभाल मिलने पर ऐसे बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह दौड़ने, खेलने और आत्मनिर्भर बनने में पूरी तरह सक्षम होते हैं।

इसी सोच के साथ सुपौल जिले में लगभग चार माह पूर्व शुरू किए गए विशेष क्लबफुट उपचार कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं। अभियान के तहत अब तक 17 बच्चों को उपचार से जोड़ा गया, जिनमें से सात बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य स्थिति में लौट चुके हैं।

एनएचएम, आरबीएसके और अनुष्का फाउंडेशन का संयुक्त प्रयास

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तकनीकी समन्वय से संचालित इस मानवीय पहल में ‘अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट’ सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के साथ मिलकर काम कर रही है।

कार्यक्रम के तहत शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क उपचार और नियमित फॉलोअप उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य नवजातों में इस विकृति की शीघ्र पहचान कर उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, ताकि आगे चलकर उन्हें किसी प्रकार की दिव्यांगता या सामाजिक उपेक्षा का सामना न करना पड़े।

जिले के 7 बच्चे हुए स्वस्थ, जानिए प्रखंडवार स्थिति

जिले के अलग-अलग प्रखंडों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा क्लबफुट से पीड़ित बच्चों को चिन्हित किया गया है। अब तक बसंतपुर और छातापुर से तीन-तीन, किशनपुर से दो, राघोपुर से एक, सरायगढ़-भपटियाही से एक, सुपौल सदर से पांच और त्रिवेणीगंज से दो बच्चों को उपचार प्रक्रिया में शामिल किया गया।

इनमें से किशनपुर के दो, सुपौल सदर के तीन और त्रिवेणीगंज के दो बच्चे पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। चिकित्सकों के मुताबिक यदि समय पर ध्यान न दिया जाए, तो बड़े होने पर बच्चों को चलने-फिरने में भारी लाचारी, शिक्षा में रुकावट और सामाजिक भेदभाव झेलना पड़ता है।

पोंसेटी पद्धति से तीन चरणों में होता है संपूर्ण उपचार

क्लबफुट का उपचार विश्वप्रसिद्ध ‘पोंसेटी पद्धति’ के आधार पर तीन वैज्ञानिक चरणों में पूरा किया जाता है:

  1. कास्टिंग (प्लास्टर): मुड़े हुए पैर को धीरे-धीरे सामान्य दिशा में लाने के लिए हल्का विशेष प्लास्टर चढ़ाया जाता है। पैर के सुधार की गति देखते हुए हर सप्ताह प्लास्टर बदला जाता है। यह प्रक्रिया सामान्यतः 4 से 8 सप्ताह तक चलती है।

  • टेनोटॉमी (लघु प्रक्रिया): जरूरत पड़ने पर एक बेहद छोटी चिकित्सकीय प्रक्रिया की जाती है, जिसमें एड़ी के पिछले हिस्से के अकिलीज टेंडन को ढीला किया जाता है, जिससे पैर स्वाभाविक स्थिति में आ सके।

  • ब्रेसिंग (विशेष जूते): पैर को दोबारा मुड़ने से रोकने के लिए बच्चे को विशेष जूते और बार पहनाए जाते हैं। चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत लगभग चार से पांच वर्ष तक इनका नियमित उपयोग आवश्यक होता है।

सदर अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को चलेगा विशेष क्लीनिक

पीड़ित बच्चों को सुलभ और केंद्रित उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से सुपौल सदर अस्पताल परिसर में विशेष क्लबफुट क्लीनिक स्थापित किया गया है। यह क्लीनिक हर मंगलवार को नियमित रूप से संचालित होगा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में स्क्रीनिंग, प्लास्टर और परामर्श की सुविधा एक ही छत के नीचे मिलेगी।

चिकित्सकों ने परिजनों से अपील की है कि जन्म के तुरंत बाद यदि बच्चे के पैर में असामान्य घुमाव दिखे, तो झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में समय गंवाने के बजाय फौरन नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल के क्लीनिक में संपर्क करें।

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