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लुधियाना यूएपीए कोर्ट ने 16 साल पुराने विस्फोटक मामले में एक व्यक्ति को बरी किया

लुधियाना की एक विशेष अदालत ने मछीवाड़ा पुलिस स्टेशन में यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज 16 साल पुराने मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया है।

विशेष न्यायाधीश सरू मेहता कौशिक ने 23 जुलाई, 2010 को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 और यूएपीए की धारा 17, 18 और 20 के तहत दर्ज एक मामले में फैसला सुनाया था।

अदालत ने एसएएस नगर (मोहाली) जिले के बूटा सिंह वाला गांव के निवासी चरणजीत सिंह उर्फ पटियालवी को मुकदमे के दौरान रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों और परिस्थितियों की जांच करने के बाद संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

यह मामला वर्षों से सुर्खियों में रहा था क्योंकि आरोपी को पहले भगोड़ा घोषित किया गया था। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने अप्रैल 2022 में उसे गिरफ्तार किया, यह दावा करते हुए कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए ग्रंथी के रूप में प्रच्छन्न एक गुरुद्वारे में रह रहा था।

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और मुकदमे के शीघ्र निपटान का निर्देश दिया था।

गौरतलब है कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी गुरमेल सिंह उर्फ बोबा को 2012 में ही दोषी ठहराया जा चुका है। 7 मार्च, 2012 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहम्मद गुलजार की अदालत ने उन्हें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत 10 साल कैद की सजा सुनाई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला कथित गैरकानूनी और आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित है और यूएपीए के कड़े प्रावधानों के तहत अपराध शामिल हैं। वर्ष 2010 में लुधियाना जिले के मछीवाड़ा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले की जांच की थी।

बहस के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने अभियोजन पक्ष के पक्ष को चुनौती दी और आरोपियों के खिलाफ सबूतों पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद विशेष अदालत ने चरणजीत सिंह को बरी कर दिया।

मामले में बचाव का काम वकील जसपाल सिंह मांझपुर, आनंद कुमार, मनजोत सिंह देओल और अर्शजोत सिंह ने किया।

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