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मध्य प्रदेश

1400 करोड़ के बैंक ऋण घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, एस कुमार्स के पूर्व सीएमडी का आलीशान बंगला कुर्क

1400 करोड़ रुपये के चर्चित बैंक ऋण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एस कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड (एसकेएनएल) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नितिन कसलीवाल से जुड़ा एक आलीशान बंगला कुर्क कर लिया है। ईडी के अनुसार इस संपत्ति का बाजार मूल्य 60 करोड़ रुपये से अधिक है।

इस कार्रवाई के साथ ही मामले में अब तक लगभग 179.55 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। इससे पहले एजेंसी ने लंदन में बकिंघम पैलेस के निकट स्थित 119.55 करोड़ रुपये की एक संपत्ति भी अटैच की थी।

फर्जी लेनदेन और फंड डायवर्जन का आरोप

ईडी की जांच में सामने आया है कि एसकेएनएल के तत्कालीन प्रमुख नितिन शंभुकुमार कसलीवाल ने अपने और परिवार के सदस्यों के नियंत्रण वाली विभिन्न समूह कंपनियों एवं संबद्ध संस्थाओं के नेटवर्क का उपयोग कर ऋण राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।

जांच एजेंसी का दावा है कि बैंकिंग प्रणाली से प्राप्त धन को कई परतों वाले वित्तीय लेनदेन (लेयरिंग) के जरिए अलग-अलग संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया और बाद में उससे संपत्तियां खरीदी गईं।

बैंकों से मिले ऋण का दुरुपयोग

ईडी के मुताबिक एसकेएनएल ने विभिन्न बैंकों के कंसोर्टियम से बड़ी ऋण सुविधाएं प्राप्त की थीं। आरोप है कि इन ऋणों का एक हिस्सा समूह की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय संबंधित कंपनियों के माध्यम से अन्य उद्देश्यों में लगाया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-अलीबाग क्षेत्र में स्थित एक मूल्यवान संपत्ति के अधिग्रहण में भी इसी धन का उपयोग किया गया था। एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति कथित अपराध से अर्जित आय से खरीदी गई थी।

विदेश तक पहुंची जांच

ईडी ने 23 दिसंबर 2025 को देश के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। छापों के दौरान विदेश में निवेश और संपत्ति खरीद से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए थे।

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ी और लंदन में बकिंघम पैलेस के समीप स्थित करोड़ों रुपये की संपत्ति को कुर्क किया गया। अब भारत में भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए संबंधित बंगले को अटैच किया गया है।

आगे भी बढ़ सकती है कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार ईडी इस मामले में वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई ऋण राशि का उपयोग किन-किन संपत्तियों और निवेशों में किया गया।

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