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पंजाब के मुख्यमंत्री ने नए बीज विधेयक का किया विरोध, बोले – किसानों के अधिकारों पर खतरा

पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए सरकारी कर्मचारियों के वेतन को दोबारा तय (Pay Re-Fixation) करने के लिए विस्तृत और एकरूप दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह फैसला Punjab and Haryana High Court के अंतिम आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2020 के आदेश के तहत कम तय किए गए वेतन को ठीक करना और पात्र कर्मचारियों को बकाया वेतन (एरियर) का भुगतान सुनिश्चित करना है। 🔍 वेतन पुनः निर्धारण (Pay Re-Fixation) का मतलब क्या है? वेतन पुनः निर्धारण का अर्थ है किसी कर्मचारी का वेतन उसकी नियुक्ति की तिथि से सही नियमों के अनुसार दोबारा तय करना। इस मामले में पाया गया कि नए भर्ती कर्मचारियों को पंजाब सरकार के अपने वेतन नियमों से कम वेतन दिया जा रहा था। ❓ नए दिशानिर्देश क्यों जारी किए गए? वित्त विभाग ने अक्टूबर 2025 में निर्देश जारी किए थे, लेकिन अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग तरीके अपनाने से भ्रम की स्थिति बन गई। अब जारी ताजा सर्कुलर में चरणबद्ध और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि अदालत के आदेशों का समान और कानूनी रूप से सही क्रियान्वयन हो सके। 👥 किन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा? 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारी 2020 के वेतन प्रतिबंध आदेश से प्रभावित कर्मचारी सभी विभागों के परिवीक्षाधीन (Probation) और गैर-परिवीक्षाधीन कर्मचारी 📌 वित्त विभाग द्वारा जारी प्रमुख दिशानिर्देश दिशानिर्देश 1: जब विभागीय वेतनमान 7वें वेतन आयोग से कम हो वेतन 7वें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) के उच्च स्तर पर तय किया जाएगा कर्मचारियों से कोई वसूली नहीं की जाएगी यह नियम पंजाब के अधिकांश 5वें वेतन आयोग के स्केल पर लागू होगा दिशानिर्देश 2: जब विभागीय वेतनमान 7वें वेतन आयोग से अधिक हो कुल वेतन (मूल वेतन + महंगाई भत्ता) की तुलना की जाएगी मूल वेतन 7वें वेतन आयोग के समान या अगले उच्च स्तर पर तय होगा तुलना के लिए भारत सरकार की DA दरें लागू होंगी दिशानिर्देश 3: परिवीक्षाधीन कर्मचारियों के लिए नियम प्रोबेशन अवधि में वेतन 7वें वेतन आयोग के सेल-1 पर तय होगा यदि विभागीय DC दरें अधिक हैं तो अधिक राशि देय होगी प्रोबेशन समाप्त होने के बाद वेतन दोबारा तय किया जाएगा दिशानिर्देश 4: लागू महंगाई भत्ता (DA) दरें तुलनात्मक गणना के लिए निम्न DA दरें लागू होंगी: 1 नवंबर 2021 से – 28% 1 अक्टूबर 2022 से – 34% 1 दिसंबर 2023 से – 38% 1 नवंबर 2024 से – 42% दिशानिर्देश 5: अनिवार्य सत्यापन सभी मामलों की जांच SAS अधिकारियों या आंतरिक ऑडिट विंग द्वारा अनिवार्य पहले से लागू मामलों की भी दोबारा समीक्षा की जाएगी ⚖️ अदालत के फैसले जिनके आधार पर निर्णय ये दिशानिर्देश Dr Saurabh Sharma vs State of Punjab और उससे जुड़े अन्य मामलों में आए अंतिम अदालती आदेशों पर आधारित हैं। अदालत ने निर्देश दिए थे कि: वेतन निर्धारण Punjab Civil Services (Revised Pay) Rules, 2016 के अनुसार हो नियुक्ति तिथि से एरियर का भुगतान किया जाए सभी विभागों में सख्त और एकरूप क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ✅ इस फैसले से हजारों नए सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों का समाधान होगा।

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्तावित सीड्स बिल 2025 का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि यह विधेयक पारंपरिक खेती को नुकसान पहुँचाएगा और बड़ी कंपनियों को फायदा पहुँचाने वाला है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि यह बिल किसानों से उनके पारंपरिक बीजों पर अधिकार छीन सकता है और उन्हें महंगे कॉर्पोरेट बीजों पर निर्भर बना देगा। इससे किसानों की आत्मनिर्भरता और कृषि परंपराओं पर गहरा असर पड़ेगा।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा,
“यह कानून किसानों के हित में नहीं, बल्कि बड़ी कंपनियों के लाभ के लिए बनाया गया है। पंजाब सरकार किसी भी ऐसे कानून का समर्थन नहीं करेगी जो किसानों के अधिकारों को कमजोर करे।”

प्रदेश के किसान संगठनों ने भी इस विधेयक पर चिंता जताई है और केंद्र सरकार से मांग की है कि किसानों से सलाह लेकर ही इस पर कोई फैसला लिया जाए।

पंजाब सरकार ने केंद्र से अपील की है कि वह इस विधेयक पर दोबारा विचार करे ताकि किसानों के अधिकार, पारंपरिक ज्ञान और टिकाऊ कृषि की रक्षा हो सके।

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