राज्य
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्षों का CM सम्राट के सामने छलका दर्द, स्टेट लीडरशिप पर उठाए गंभीर सवाल
संगठन की धरातल पर नब्ज टटोलने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) की ओर से बुधवार बुलाई गई बैठक में भाजपा पूर्व जिलाध्यक्षों का दर्द छलका। 250 से अधिक जिलाध्यक्षों मेें कईयों ने पार्टी में उपेक्षा एवं अनदेखी को लेकर क्षोभ प्रकट किया। प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े किए।
इसके साथ ही लोक सेवक आवास के नेक संवाद में हुई बैठक महज संगठनात्मक मुलाकात के बजाय राजनीतिक रूप से भड़ास निकालने का मंच बन गया। विशेषकर प्रदेश संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया की ओर से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी बात बताने पर जिलाध्यक्षों ने प्रतिकार किया।
जिलाध्यक्षों की शिकायत थी कि प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से समय मांगने पर समय नहीं मिलता है। दिल्ली से आए पार्टी के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र नाथ त्रिपाठी की उपस्थिति में प्रदेश नेतृत्व की कार्यप्रणाली की कमियां गिनाईं।
इस बीच तल्खी बढ़ते देख मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं मोर्चा संभाला। जिलाध्यक्षों के एक-एक प्रश्न के उत्तर दिए। समय आने पर अवसर देने का भरोसा दिया।
इसी बीच जिलाध्यक्षों की शिकायत थी कि बारबार एक व्यक्ति को एमएलसी बनाने के बजाए पूर्व जिलाध्यक्षों मौका दिया जाए। विशेष कर 45-50 वर्ष संगठन गढ़ने वालों की उपेक्षा की जा रही है। आयोग, बोर्ड एवं निगम में वर्षों संगठन गढ़ने वालों समायोजित कर सम्मान देना चाहिए।
दरअसल, मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी का पार्टी के पुराने संगठनात्मक चेहरों से पहला सीधा संवाद भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है। पूर्व जिलाध्यक्ष लंबे समय तक जिलों में पार्टी रीढ़ रहे हैं। ऐसे में उन्हें स्थानीय राजनीतिक समीकरण, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सामाजिक समूहों के रुख और विपक्ष की गतिविधियों की जमीनी जानकारी होती है।
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इन नेताओं से फीडबैक लेकर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की सहभागिता रही।
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा की सत्ता में सहभागिता बढ़ाने की साथ ही वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की अपेक्षा भी बढ़ी है। पूर्व जिलाध्यक्षों को एक मंच पर बुलाने से संगठन के पुराने और नए नेतृत्व के बीच संवाद बढ़ाने की पहल की है।
बैठक का एक अहम राजनीतिक पहलू यह भी है कि पूर्व जिलाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के प्रभावशाली कार्यकर्ताओं और सामाजिक समीकरणों से गहराई से जुड़े हैं। इसे सम्राट चौधरी की सरकार के साथ संगठन को भी साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका पार्टी के पुराने पदाधिकारियों से संवाद यह संकेत देता है कि वे सत्ता और संगठन के बीच दूरी नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक संपर्क बनाए रखना चाहते हैं।
साथ ही, पूर्व जिलाध्यक्षों की सक्रियता का इस्तेमाल आने वाले समय में भाजपा के राजनीतिक विस्तार और जनसंपर्क अभियान में भी किया जा सकता है। विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के 25 वर्ष पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील पार्टी के संगठन महामंत्री करेंगे।
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