Connect with us

मध्य प्रदेश

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या को लेकर स्थिति संतोषजनक है, लेकिन चीता प्रोजेक्ट से जुड़े कर्मचारियों को मिलने वाले चीता भत्ते को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। कूनो में वनरक्षक व अधिकारियों को 20 माह से चीता भत्ता नहीं मिला है, जो कि 1500 रुपये के करीब प्रति अधिकारी-कर्मचारी दिया जाता था। इसे लेकर स्टाफ ने अधिकारियों से सवाल भी किए लेकिन जवाब नहीं मिला। सबसे अहम जिम्मेदारी, फिर भी संसाधनों की कमी इससे चीतों की निगरानी में दिन-रात जुटे रहने वाले स्टाफ में असंतोष है। चीतों की ट्रैकिंग को सबसे प्राथमिकता का कार्य माना जाता है, जिसमें स्टाफ के अनुसार सीमित संसाधन में पूरी ट्रैकिंग करनी होती है। इसमें भी लंबे समय से भत्ता नहीं मिला है। चीतों पर खर्च पर विधानसभा में भी प्रश्न उठ चुके हैं। कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर चुकी है। प्रोजेक्ट की शुरुआत में मिली थी प्राथमिकता बता दें कि कूनो नेशनल पार्क मे चीतों का घर बसाने से पहले चीतों की निगरानी से लेकर बजट आदि की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई थी। चीतों की ट्रैकिंग के साथ साथ चीता मित्र का कंसेप्ट भी लाया गया था। जिससे कूनो के आसपास के गांवों के लोग चीतों को लेकर रूबरू हो सकें और चीता मित्र बनकर सुरक्षा में भागीदारी करें। यह वीडियो भी देखें Play 0:00 / 6:00 Settings Enter fullscreen mode यह भी पढ़ें- कूनो से लापता चीता निर्वा 13 दिन बाद खेतों में स्वस्थ मिली, नई कॉलर आईडी लगाकर फिर जंगल में छोड़ा पहले मिला भत्ता, फिर भुगतान हो गया लंबित इसी प्रोजेक्ट की शुरुआत में वन विभाग ने सहयोग के माध्यम से चीता ट्रैकरों के लिए बाइकों की व्यवस्था भी कराई थी, लेकिन यह कम ही संख्या में आ सकीं थीं और सभी को न मिलने के कारण तब असंतोष की स्थिति बनी थी। चीता ट्रैकिंग के काम को फोकस के साथ करने को लेकर चीता भत्ता की व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन यह आरंभ में प्रदान किया गया। इसके बाद लंबित होने की स्थिति में आ गया। अब 20 माह का समय हो चुका है, लेकिन चीता भत्ता प्रदान नहीं किया गया है। नाम न बताने की शर्त पर चीता ट्रैकरों का कहना है कि चीता भत्ता को लेकर सुनवाई नहीं हो रही है। साथ ही साधन व संसाधन की कमी से भी वे जूझ रहे हैं। चीतों की ट्रैकिंग को लेकर दिन-रात डयूटी रहती है, जिसमें डीजल से लेकर अन्य संसाधनों को लेकर भी परेशानी होती है, इसको लेकर बात उठाई जाती है, लेकिन अधिकारियों की ओर से सुनवाई नहीं होती है।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या को लेकर स्थिति संतोषजनक है, लेकिन चीता प्रोजेक्ट से जुड़े कर्मचारियों को मिलने वाले चीता भत्ते को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। कूनो में वनरक्षक व अधिकारियों को 20 माह से चीता भत्ता नहीं मिला है, जो कि 1500 रुपये के करीब प्रति अधिकारी-कर्मचारी दिया जाता था। इसे लेकर स्टाफ ने अधिकारियों से सवाल भी किए लेकिन जवाब नहीं मिला।

सबसे अहम जिम्मेदारी, फिर भी संसाधनों की कमी

इससे चीतों की निगरानी में दिन-रात जुटे रहने वाले स्टाफ में असंतोष है। चीतों की ट्रैकिंग को सबसे प्राथमिकता का कार्य माना जाता है, जिसमें स्टाफ के अनुसार सीमित संसाधन में पूरी ट्रैकिंग करनी होती है। इसमें भी लंबे समय से भत्ता नहीं मिला है। चीतों पर खर्च पर विधानसभा में भी प्रश्न उठ चुके हैं। कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर चुकी है।

प्रोजेक्ट की शुरुआत में मिली थी प्राथमिकता

बता दें कि कूनो नेशनल पार्क मे चीतों का घर बसाने से पहले चीतों की निगरानी से लेकर बजट आदि की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई थी। चीतों की ट्रैकिंग के साथ साथ चीता मित्र का कंसेप्ट भी लाया गया था। जिससे कूनो के आसपास के गांवों के लोग चीतों को लेकर रूबरू हो सकें और चीता मित्र बनकर सुरक्षा में भागीदारी करें।

पहले मिला भत्ता, फिर भुगतान हो गया लंबित

इसी प्रोजेक्ट की शुरुआत में वन विभाग ने सहयोग के माध्यम से चीता ट्रैकरों के लिए बाइकों की व्यवस्था भी कराई थी, लेकिन यह कम ही संख्या में आ सकीं थीं और सभी को न मिलने के कारण तब असंतोष की स्थिति बनी थी। चीता ट्रैकिंग के काम को फोकस के साथ करने को लेकर चीता भत्ता की व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन यह आरंभ में प्रदान किया गया। इसके बाद लंबित होने की स्थिति में आ गया। अब 20 माह का समय हो चुका है, लेकिन चीता भत्ता प्रदान नहीं किया गया है।

नाम न बताने की शर्त पर चीता ट्रैकरों का कहना है कि चीता भत्ता को लेकर सुनवाई नहीं हो रही है। साथ ही साधन व संसाधन की कमी से भी वे जूझ रहे हैं। चीतों की ट्रैकिंग को लेकर दिन-रात डयूटी रहती है, जिसमें डीजल से लेकर अन्य संसाधनों को लेकर भी परेशानी होती है, इसको लेकर बात उठाई जाती है, लेकिन अधिकारियों की ओर से सुनवाई नहीं होती है।

Instagram

Facebook

Janta Voice Times

Janta Voice Times All India News

Trending

Copyright © 2025 Janta Voice Times. * All Rights Reserved. *