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बिहार-झारखंड

कोसी में सरसों की खेती के साथ तैयार होगा ‘सफेद शहद’, विदेशों तक है भारी मांग; किसानों की होगी ‘चांदी’

कोसी क्षेत्र की बलुआई- दोमट मिट्टी और जलवायु सरसों के बेहतर उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।

इस लिहाज से उद्यान विभाग ने न सिर्फ इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरसों के खेती की योजना बनाया है, बल्कि सरसों की खेती के समय उच्च क्वालिटी का सफेद शहद भी तैयार कराने की योजना तैयार किया है।

इस शहद की देश से विदेश तक काफी मांग है। इसके लिए किसानों को आवश्यक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

राजेन्द्र सुफलाम और पूसा सरसों की होगी खेती:

कोसी क्षेत्र की जलवायु के लिहाज से राजेन्द्र सुफलाम, पूसा सरसों 25 और पूसा सरसों 27 की खेती की योजना है। राजेन्द्र सुफलाम एक रोगरोधी और टिकाऊ उत्पादन देता है। पूसा सरसों 25 सिंचित क्षेत्रों में अच्छी पैदावार देनेवाला कम दिनों में पकनेवाली किस्म है।

इसके अलावा पूसा बाेल्ड की खेती की जाएगी, जिसका दाना मोटा होता है। इस कारण इसका बाजार भाव भी अधिक मिलता है। इससे अधिक तेल भी निकलता है।

स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद है मस्टर्ड शहद:

सरसों से तैयार होनेवाला शहद, जो अन्य शहद से अलग सफेद रंग का होता है, यह अपने एंटी बैक्टेरियल और पोषक तत्वों से भरपूर गुणों के कारण सेहद के लिए काफी फायदेमंद होता है।

जानकारों का कहना है कि इसमें प्राकृतिक एंजाइम और एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और संक्रमण को रोकने में मदद करता है।

इसमें प्राकृतिक ग्लूकोज और फ्रुक्टोज होता है, जो बिना चीनी के नुकसान के शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इस कारण इस शहद का देश व विदेश में काफी मांग है।

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