मध्य प्रदेश
MP में 65 साल बाद सरकारी सेवा-शर्तों में बड़ा बदलाव: अब नैतिक पतन सिद्ध होने पर भी नहीं मिलेगी नौकरी, जानें नए नियम
मध्य प्रदेश सरकार शासकीय सेवाओं की सामान्य शर्तों में 65 वर्षों बाद बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत अब केवल महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति ही नहीं, बल्कि हत्या, भ्रष्टाचार और अन्य नैतिक पतन से जुड़े गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा।
वर्तमान में लागू सेवा शर्तें वर्ष 1961 में बनाई गई थीं। समय-समय पर इनमें संशोधन तो हुए, लेकिन कई प्रावधानों को लेकर विभागों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी। इसके चलते सामान्य प्रशासन विभाग से बार-बार मार्गदर्शन लेना पड़ता था, जिससे नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी होती थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने नियमों को नए सिरे से व्यवस्थित और स्पष्ट करने का निर्णय लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया द्वारा तैयार किए गए प्रारूप पर 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। सुझावों के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
परिवीक्षा अवधि पर भी स्पष्ट प्रावधान
नए मसौदे में परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन) को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, निर्धारित परिवीक्षा अवधि पूरी होने के बाद अधिकतम छह माह के भीतर कर्मचारी को स्थायी करने अथवा न करने का निर्णय लेना होगा। यदि तय समयसीमा में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो संबंधित कर्मचारी को स्वतः स्थायी सेवा के लिए योग्य मान लिया जाएगा।
एक से अधिक जीवित जीवनसाथी पर नौकरी नहीं
प्रस्तावित नियमों में एक से अधिक जीवित जीवनसाथी रखने वाले व्यक्तियों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र बनाए रखने का प्रावधान यथावत रखा गया है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सरकार को छूट देने का अधिकार रहेगा।
स्वास्थ्य परीक्षण में असफल तो नहीं मिलेगी नियुक्ति
सरकारी नौकरी के लिए स्वास्थ्य परीक्षण में सफल होना अनिवार्य रहेगा। यदि किसी अभ्यर्थी को मेडिकल जांच में अयोग्य घोषित किया जाता है, तो उसकी नियुक्ति में किसी प्रकार की प्रशासनिक छूट या विवेकाधिकार का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
दो बच्चों का नियम रहेगा लागू
राज्य सरकार ने दो बच्चों से संबंधित पात्रता नियम को यथावत बनाए रखा है। वहीं, वरिष्ठता निर्धारण के लिए पदभार ग्रहण करने की तिथि के बजाय चयन सूची में अभ्यर्थी की स्थिति को आधार बनाया जाएगा। यानी किसी अभ्यर्थी ने पहले या बाद में जॉइन किया हो, उसकी वरिष्ठता चयन सूची में प्राप्त क्रम के अनुसार तय होगी।
पदोन्नति में भी होगा स्पष्ट मापदंड
वरिष्ठता-सह-उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों की वरिष्ठता उसी संवर्ग के अनुसार निर्धारित की जाएगी, जहां से उन्हें पदोन्नत किया गया है। सरकार का मानना है कि नए नियमों से नियुक्ति, वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े विवादों में कमी आएगी तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बन सकेंगी।
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