राज्य
मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट, भड़कीं कांग्रेस नेता बोलीं- ‘यह लोकतंत्र में सीट की चोरी है’
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को निरस्त कर दिया गया। नटराजन के शपथ पत्र में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छुपाने की भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति का संज्ञान लेकर रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन निरस्त कर दिया।
मध्य प्रदेश में तीन सीटों में से दो सीट भाजपा की जीत तय थी
बता दें कि राज्य में राज्यसभा की तीन सीटों में से दो सीट भाजपा की जीत तय थी। ऐसे में कांग्रेस ने सिर्फ एक ही सीट पर प्रत्याशी घोषित किया था। भाजपा प्रत्याशी महेश केवट, रजनीश अग्रवाल और भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के समक्ष आपत्ति दर्ज की थी कि मीनाक्षी नटराजन ने शपथ पत्र में आपराधिक प्रकरण की जानकारी छुपाई।

महेश केवट की ओर से रिटर्निग अधिकारी के समक्ष पक्ष रखने के लिए अधिकृत किए सेवानिवृत्त जस्टिस व भाजपा नेता रोहित आर्या ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, शपथ पत्र में प्रत्याशी को अपने विरुद्ध आपराधिक मामले की जानकारी देनी होती है, इसे छिपाने पर नामांकन निरस्त हो सकता है।
नामांकन पत्र के पार्ट ए में नटराजन ने अपनी संपत्ति घोषित की है
नामांकन पत्र के पार्ट ए में नटराजन ने अपनी संपत्ति घोषित की है लेकिन सेट बी में रिक्त छोड़ दी। उनके खिलाफ मुकदमा (केस नंबर- 4471/ 72) ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट हैदराबाद में लंबित है।
वहीं, इससे पहले नामांकन पत्रों की छानबीन के लिए विधानसभा परिसर स्थित राज्यसभा चुनाव निर्वाचन कार्यालय में गहमागहमी रही। कई बार तनाव के क्षण आए। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी हुई। धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, तब भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
इस आधार पर निरस्त किया नामांकन-रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन पत्र के फार्म 26 में शपथ पत्र में मुकदमे का उल्लेख नही किया था।
नटराजन इस मामले से अनभिज्ञ होने का दावा नहीं कर सकतीं, क्योंकि वह पूर्व में कोर्ट के समन का जवाब दे चुकी हैं। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, अधूरा शपथ पत्र देना तथा अभ्यर्थी द्वारा तत्वों को छुपाया जाना मीनाक्षी नटराजन के विरुद्ध सिद्ध पाया गया।
मुख्यमंत्री बोले- कांग्रेस के विधायक नहीं थे उनके साथ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर निर्वाचन अधिकारी को भ्रम में रखा। मैं इस स्क्रूटनी की प्रक्रिया का स्वागत करता हूं। मुझे तो लगता है कि कांग्रेस को हार का डर था। उनका हवाई जहाज केवल 18 लोगों को लेकर बेंगलुरु गया, इसका मतलब है कि उनके साथ उनके विधायक ही नहीं थे। यह षडयंत्र उसी प्रकार का है, जब पूर्व में लोकसभा चुनाव में उनका इंदौर का प्रत्याशी मैदान छोड़ गया था, यह जानकर हार के डर से बचने के हथकंडे अपनाते हैं।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नटराजन के आपराधिक प्रकरण के दस्तावेज हमें कांग्रेस के लोगों ने ही दिए। कांग्रेस में क्या स्थिति है, खुद ही समझ जाए। उन्होंने कहा कि न्याय की जीत हुई है। हमारे प्रत्याशी महेश केवट को रामलला का आशीर्वाद मिला है। चुनाव होते तो भी वह राज्यसभा सदस्य बनते।
वोट चोरी के बाद अब सीट चोरी : मीनाक्षी
नामांकन निरस्त होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि वोट चोरी के बाद अब सीट चोरी पर भाजपा उतर आई है। भाजपा को पता था कि उनके पास संख्याबल नहीं है फिर भी प्रत्याशी उतारा, तभी से खेल शुरू हो गया था। जब यह पाया कि कांग्रेस विधायक दल में सेंध नहीं लगाए पाएंगे तो यह खेल खेला। जिस मामले में संज्ञान तक नहीं लिया गया, उसे आधार बनाकर नामांकन निरस्त कर दिया। यह केवल मेरा मामला नहीं है, सवाल यह है कि लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा या नहीं।
पटवारी बोले- न्यायालय जाएंगे
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और अधिवक्ता अजय गुप्ता का कहना है कि भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 223 स्वयं कहती है कि यह मामला आपराधिक प्रकरण की श्रेणी में ही नहीं आता है। संज्ञान लेने की बात तो दूर है। हमारी कोई बात रिटर्निंग आफिसर ने सुनी ही नहीं है।
आपत्तिकर्ताओं का पक्ष आदेश में लिखा, मगर हमारी बात नहीं। उन्हें पता है कि दो दिन बचे हैं, जब तक न्यायालय जाएंगे, तब तक भाजपा के तीनों प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। यह आदेश असंवैधानिक है और इसे न्यायालय में चुनौती देंगे।
रनवे से लौटा विमान – उधर, कांग्रेस अपने विधायकों को बेंगलुरु ले जाने के लिए तैयार थी। विमान पहुंच गया था लेकिन उसे उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली। करीब दो घंटे की कवायद के बाद अनुमति मिली और विधायक स्वजन के साथ विमान में बैठ भी गए मगर नामांकन निरस्त होने की सूचना मिलते ही रनवे से विमान वापस बुला लिया गया।
झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नाम पर विवाद, नामांकन होल्ड पर
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर चल रही नामांकन की प्रक्रिया के बीच भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवाणी के नाम पर विवाद हो गया है।
मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के क्रम में कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के निर्वाचन अभिकर्ता व प्रस्तावक विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने नथवाणी के नाम व अन्य बिंदुओं को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी व विधानसभा के सचिव रंजीत कुमार ने नथवाणी के नामांकन को होल्ड पर रखते हुए उन्हें बुधवार को आपत्तियों पर बिंदुवार लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया।
उधर, सत्ता पक्ष में झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम तथा कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा के नामांकन पत्र सही पाए गए हैं। अब बुधवार को ही स्पष्ट होगा कि नथवाणी चुनाव मैदान में होंगे या नहीं।
आपत्ति में कहा गया है कि राज्यसभा चुनाव के नामांकन के लिए संलग्न किए गए दस्तावेज में उनका नाम अलग-अलग तरीके से लिखा गया है। नथवाणी ने दाखिल नामांकन पत्र के दोनों सेट के पहले पार्ट में अपना नाम नथवाणी परिमल लिखा है।
शपथपत्र में भी उनका नाम यही है, लेकिन इसके साथ संलग्न नन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर में उनका नाम परिमल नथवाणी है। निर्वाची पदाधिकारी ने परिमल नथवाणी के नामांकन पत्र को लेकर दर्ज आपत्ति तथा नामांकन होल्ड पर रखे जाने की जानकारी निर्वाचन आयोग को भी दी है।

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