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मध्य प्रदेश

BJP विधायक संजय पाठक के खिलाफ मानहानि प्रकरण में MP हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़े मानहानि प्रकरण में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कटनी के आर्म्स डीलर नाजिम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि शिकायत मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।

यह है मामला

याचिकाकर्ता नाजिम खान का आरोप है कि विधायक संजय पाठक ने सार्वजनिक मंचों पर उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। याचिका के अनुसार विधायक ने दावा किया था कि नाजिम खान के स्टॉक से 14 हजार कारतूस गायब हैं, अवैध हथियारों की बिक्री की जा रही है तथा आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को हथियार लाइसेंस दिलाने में उनकी भूमिका है।

नाजिम खान ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और मानहानिकारक बताते हुए कहा है कि इससे उनकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही किसी प्रकार की जांच शुरू की गई।

याचिका में राज्य मशीनरी की कथित निष्क्रियता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

संजय पाठक से जुड़े मामलों में दूसरी बार अलग हुए जस्टिस विशाल मिश्रा

इस मामले से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भाजपा विधायक संजय पाठक से संबंधित मामलों की सुनवाई से हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा दूसरी बार स्वयं को अलग कर चुके हैं। इससे पहले सितंबर 2025 में भी उन्होंने एक अन्य प्रकरण की सुनवाई से यह कहते हुए स्वयं को अलग कर लिया था कि विधायक की ओर से उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया था।

उस मामले में बाद में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए थे। संबंधित मामला अभी न्यायालय में लंबित है। मौजूदा प्रकरण में भी न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया, जिसके बाद मामला दूसरी पीठ के समक्ष आया।

अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के जवाब और 6 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

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