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मध्य प्रदेश

उत्तर बस्तर में नक्सलियों को बड़ा झटका: कुख्यात मल्लेश समेत कई ने किया आत्मसमर्पण, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

उत्तर बस्तर में नक्सलियों को बड़ा झटका: कुख्यात मल्लेश समेत कई ने किया आत्मसमर्पण, सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता

उत्तर बस्तर/भोपाल, 25 फरवरी 2026।
मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे उत्तर बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे समय से सक्रिय कुछ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें कुख्यात नक्सली मल्लेश का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह समर्पण अभियान क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

सुरक्षा बलों के लगातार अभियान का असर

पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त ऑपरेशन का असर अब साफ दिखने लगा है। पिछले कई महीनों से सुरक्षा एजेंसियां इलाके में सघन तलाशी अभियान चला रही थीं। साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों से संवाद और पुनर्वास योजनाओं के बारे में जागरूकता भी बढ़ाई जा रही थी।

अधिकारियों के अनुसार, लगातार दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के कारण कई नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया। मल्लेश सहित अन्य नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है।

कौन है मल्लेश?

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, मल्लेश लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में शामिल था और कई घटनाओं में उसकी संलिप्तता की जांच चल रही थी। उस पर सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने के आरोप थे। उसके आत्मसमर्पण को सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ

सरकार की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, आर्थिक सहायता और कौशल प्रशिक्षण की सुविधा दी जाती है। अधिकारियों ने बताया कि समर्पण करने वालों को निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब बड़े नाम वाले नक्सली संगठन छोड़ते हैं, तो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। इससे अन्य सक्रिय सदस्यों में भी आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

सुरक्षा स्थिति में सुधार की उम्मीद

उत्तर बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से नक्सल गतिविधियां चिंता का विषय रही हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास कार्यों के कारण हालात में सुधार देखा गया है।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका मानना है कि विकास और सुरक्षा दोनों साथ-साथ चलें, तभी स्थायी शांति संभव है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कई नेताओं ने सुरक्षा बलों की सराहना करते हुए इसे बड़ी सफलता बताया है। वहीं सामाजिक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि ऐसे कदमों से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।

आगे की रणनीति

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अभियान जारी रहेगा। आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ हिंसक गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।

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