हरियाणा
गुरुग्राम-फरीदाबाद में मातृत्व सेवाओं का बदलता रुझान: 70% से अधिक प्रसव निजी अस्पतालों में
गुरुग्राम/फरीदाबाद।
हरियाणा के प्रमुख शहरी जिलों Gurugram और Faridabad में मातृत्व सेवाओं को लेकर एक नया रुझान सामने आया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन शहरों में 70 प्रतिशत से अधिक बच्चों का जन्म निजी अस्पतालों में हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में प्रसव की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित क्षमता और निजी अस्पतालों में उपलब्ध उन्नत संसाधन इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं।

निजी अस्पतालों की ओर झुकाव क्यों?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी परिवार बेहतर सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों, 24×7 विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और कम प्रतीक्षा समय के कारण निजी अस्पतालों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषकर उच्च जोखिम (हाई-रिस्क) गर्भावस्था के मामलों में परिवार अत्याधुनिक एनआईसीयू (NICU) और इमरजेंसी सेवाओं वाले निजी केंद्रों को सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
इसके अलावा, कई निजी अस्पताल कैशलेस बीमा सुविधाएं, पैकेज आधारित डिलीवरी प्लान और व्यक्तिगत देखभाल की सेवाएं प्रदान करते हैं, जिससे मध्यम और उच्च आय वर्ग के परिवारों का रुझान बढ़ा है।
सरकारी अस्पतालों की चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अधिक होने से भीड़भाड़ की स्थिति रहती है। डॉक्टर-नर्स अनुपात, बेड की उपलब्धता और उपकरणों की कमी जैसी समस्याएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि सरकार ने पिछले वर्षों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए हैं, फिर भी शहरी इलाकों में निजी संस्थानों की तुलना में सरकारी सुविधाएं पीछे नजर आती हैं।
कुछ चिकित्सकों का यह भी कहना है कि सरकारी अस्पतालों में सेवाएं किफायती और कई योजनाओं के तहत निःशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और सेवा गुणवत्ता की धारणा (Perception) के कारण लोग निजी विकल्प चुनते हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) की दर बढ़ना सकारात्मक संकेत है, चाहे वह निजी हो या सरकारी। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निजी क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ सकती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
संतुलन बनाने की जरूरत
नीतिगत विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को शहरी सरकारी अस्पतालों की क्षमता, आधारभूत ढांचे और मानव संसाधन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। यदि सरकारी संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं, पर्याप्त स्टाफ और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, तो नागरिकों का भरोसा दोबारा बढ़ सकता है।
साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के माध्यम से मातृत्व सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार किया जा सकता है। डिजिटल रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट सिस्टम और प्रसव पूर्व (Antenatal) देखभाल को मजबूत करने से भी सरकारी अस्पतालों की छवि सुधर सकती है।
आगे की राह
गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे तेजी से विकसित होते शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने चुनौती है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ करते हुए निजी क्षेत्र के साथ संतुलन बनाए।
यदि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है, तो मातृत्व सेवाओं में यह असंतुलन धीरे-धीरे कम हो सकता है। फिलहाल, आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि शहरी हरियाणा में मातृत्व सेवाओं का केंद्र तेजी से निजी अस्पतालों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

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