नई दिल्ली के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं सम्मेलन केंद्र भारत मंडपम में हाल ही में ग्लोबल AI समिट का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योगपति और नीति-निर्माता शामिल हुए। कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
बताया जा रहा है कि समिट के दौरान कुछ युवाओं ने विरोध प्रदर्शन की कोशिश की। उनके हाथों में विशेष स्लोगन लिखी टी-शर्ट और पोस्टर थे। इसी कथित विरोध की जांच में दिल्ली पुलिस ने ग्वालियर के युवा कांग्रेस नेता जितेंद्र यादव को हिरासत में लिया।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की एक टीम रविवार देर रात ग्वालियर पहुंची। स्थानीय पुलिस की मदद से युवा कांग्रेस से जुड़े नेता जितेंद्र यादव को उनके निवास से हिरासत में लिया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने बिना पूर्व सूचना और पर्याप्त दस्तावेज दिखाए कार्रवाई की।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई समिट के दौरान संभावित सुरक्षा उल्लंघन और विरोध प्रदर्शन की साजिश के इनपुट के आधार पर की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए समिट स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी, जिसकी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर भी है जो कथित तौर पर टी-शर्ट प्रिंटिंग का काम करता है। पुलिस को शक है कि विरोध प्रदर्शन के लिए विशेष संदेशों वाली टी-शर्ट तैयार करवाई गई थीं। इसी कड़ी में टी-शर्ट प्रिंटर से पूछताछ की जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इन टी-शर्ट्स को किसी संगठित अभियान के तहत तैयार कराया गया था या यह व्यक्तिगत स्तर पर किया गया विरोध था। फिलहाल पुलिस आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा करने से बच रही है।
इस कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे “लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश” बताया है। उनका कहना है कि अगर किसी ने शांतिपूर्ण विरोध की योजना बनाई थी, तो उसे आपराधिक साजिश की तरह पेश करना गलत है।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। अगर सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी प्रकार के व्यवधान की आशंका थी, तो कार्रवाई करना उनका कर्तव्य है।
जितेंद्र यादव के परिजनों का कहना है कि उन्हें देर रात अचानक पुलिस के आने की सूचना मिली। परिवार का दावा है कि यादव सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, लेकिन उन्होंने किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में भाग नहीं लिया।
परिवार के वकीलों ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया और नोटिस को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी संगठित डिजिटल कैंपेन के जरिए लोगों को भारत मंडपम के बाहर इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया गया था।
तकनीकी टीम डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसमें व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के आधार पर ही कई अहम सुराग मिले हैं।
AI समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी जाती है। विदेशी प्रतिनिधियों और उच्च स्तरीय मेहमानों की मौजूदगी के कारण किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना प्राथमिकता होती है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि उनकी कार्रवाई पूरी तरह से कानून के दायरे में है और जांच के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
फिलहाल, जितेंद्र यादव से पूछताछ जारी है। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है या केवल हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस आने वाले दिनों में और खुलासे कर सकती है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि बड़े सरकारी आयोजनों के दौरान विरोध प्रदर्शनों की सीमा क्या होनी चाहिए और सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि कांग्रेस इसे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनाती है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां अपने कदमों को उचित ठहराने के लिए साक्ष्यों पर जोर दे रही हैं।
कुल मिलाकर, भारत मंडपम में आयोजित AI समिट के दौरान शुरू हुआ यह विवाद अब दिल्ली से ग्वालियर तक फैल चुका है। जांच जारी है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे इस मामले में क्या कानूनी और राजनीतिक मोड़ आते हैं।