बिहार-झारखंड
पटना में डॉक्टरों के लिए पर्ची पर दवा का शुद्ध नाम लिखना अनिवार्य, राज्य सरकार का आदेश जारी
पटना: मरीजों को सही, सुरक्षित और किफायती इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) ने एक अहम फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब पटना समेत पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों को मरीजों की पर्ची पर दवा का नाम शुद्ध, स्पष्ट और CAPITAL LETTERS में लिखना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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आदेश का उद्देश्य
नेशनल मेडिकल कमिशन के अनुसार, डॉक्टरों की अस्पष्ट लिखावट के कारण अक्सर दवा पढ़ने में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इससे कई बार मरीज को गलत दवा या गलत मात्रा मिलने का खतरा रहता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए दवा का नाम साफ और बड़े अक्षरों में लिखने का निर्देश जारी किया गया है।
साथ ही, इस फैसले का एक बड़ा उद्देश्य मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के बजाय जेनेरिक दवाओं की ओर प्रेरित करना है, ताकि इलाज का खर्च कम हो और आम लोगों को राहत मिल सके।
जेनेरिक दवाओं पर सख्ती
एनएमसी के निर्देश के अनुसार अब डॉक्टरों को पर्ची पर केवल जेनेरिक दवाओं का नाम लिखना होगा। किसी भी प्रकार की ब्रांडेड दवा का नाम लिखना प्रतिबंधित कर दिया गया है। यदि किसी डॉक्टर द्वारा आदेश का उल्लंघन किया जाता है, तो उसकी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
जेनेरिक दवाओं में वही औषधीय तत्व होते हैं जो ब्रांडेड दवाओं में पाए जाते हैं, लेकिन इनकी कीमत काफी कम होती है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।
किन अस्पतालों में लागू होगा आदेश
यह निर्देश पटना एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस समेत बिहार के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में लागू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जल्द ही इसे जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी लागू किया जाएगा।
सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को आदेश दिया गया है कि वे इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
लिखावट को लेकर भी निर्देश
नेशनल मेडिकल कमिशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की लिखावट साफ और पढ़ने योग्य होनी चाहिए। पर्ची पर दवा का नाम इस तरह लिखा जाए कि फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्यकर्मी को उसे समझने में किसी तरह की परेशानी न हो। बार-बार अस्पष्ट लिखावट पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मरीजों को होगा सीधा लाभ
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से मरीजों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा।
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गलत दवा मिलने की संभावना कम होगी
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इलाज का खर्च घटेगा
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दवा वितरण में पारदर्शिता आएगी
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मरीज को सही और स्पष्ट जानकारी मिलेगी
खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम
नेशनल मेडिकल कमिशन का यह निर्णय स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस आदेश का सही तरीके से पालन होता है, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
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