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बिहार-झारखंड

पारंपरिक देशी हुनर पर अंतरराष्ट्रीय मुहर: भोपाली बटुआ और खजुराहो मेटल क्राफ्ट सहित MP के चार उत्पाद GI सूची में शामिल

मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (जरी-जरदोजी) समेत प्रदेश के चार विशिष्ट उत्पादों को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है।

इसमें राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की अहम भूमिका रही है, जिसने पूरी प्रक्रिया में वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और शिल्पकार समूहों के साथ समन्वय स्थापित किया।इस सफलता को धरातल पर उतारने में मप्र के एमएसएमई विभाग तथा जीआई मैन ऑफ इंडिया के रूप में प्रसिद्ध पद्मश्री रजनीकांत का तकनीकी मार्गदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। विभिन्न हितधारकों के समन्वित प्रयासों के चलते ही इन पारंपरिक शिल्पों को यह कानूनी और वैश्विक संरक्षण मिल सका है।

जीआई टैग से यह फायदा होगा

ब्रांड वैल्यू में इजाफा: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की प्रामाणिकता बढ़ेगी, जिससे इनके सही दाम मिलेंगे।
नकली उत्पादों पर रोक: कोई भी अन्य क्षेत्र इन नामों का गलत इस्तेमाल कर नकली सामान नहीं बेच पाएगा।
महिला सशक्तीकरण: स्थानीय शिल्पकारों, विशेषकर गृह उद्योग से जुड़ी महिला कारीगरों के लिए सतत रोजगार और आय के नए रास्ते खुलेंगे।

इन चार विशिष्ट उत्पादों को मिला ‘जीआई टैग’

– भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट (जिला: भोपाल)– नफासत और बेहतरीन जरी-जरदोजी कला का प्रतीक।
– खजुराहो मेटल क्राफ्ट (जिला: छतरपुर)– पीतल और धातुओं पर उकेरी गई बारीक कारीगरी।
– मालवा पेंटिंग (मालवा क्षेत्र, मुख्य रूप से जिला:धार)– क्षेत्र की पारंपरिक और समृद्ध लोक चित्रकला।
– सारंगपुर हैंडलूम साड़ी एवं फैब्रिक्स (जिला: राजगढ़)– पारंपरिक रूप से तैयार उच्च गुणवत्ता वाला हथकरघा कपड़ा।

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