बिहार-झारखंड
‘पुलिस मरे तो ठीक, एनकाउंटर करे तो…’, भरत तिवारी मामले पर बोले जीतन राम मांझी
पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी रविवार को भेलावर थाना क्षेत्र के निसरपुरा गांव पहुंचकर दोहरे हत्याकांड से प्रभावित परिवार से मुलाकात की।
पीड़ित स्वजन को सांत्वना देने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए घटना को पुलिस की निष्क्रियता का परिणाम बताया और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
मांझी ने कहा कि निसरपुरा गांव में हुई दूसरी हत्या को रोका जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवम की हत्या के बाद उसके परिवार के लोगों को लगातार धमकियां मिल रही थीं।
स्वजन द्वारा इसकी शिकायत कई बार पुलिस प्रशासन से की गई, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना था कि यदि पुलिस ने तत्काल कदम उठाती तो परिवार के दूसरे सदस्य की हत्या नहीं होती।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की भूमिका को गैर-जिम्मेदाराना बताया।
उन्होंने कहा कि मामले में जो भी प्रारंभिक कार्रवाई हुई, वह आईजी की सक्रियता के कारण संभव हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक मृतक का मोबाइल फोन बरामद नहीं होना, पुलिस की बड़ी विफलता है, क्योंकि इससे जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती थी।
मांझी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में डीजीपी से बातचीत की है। अभी भी परिवार के लोगों को धमकी मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि दो-तीन दिनों के भीतर फरार आरोपितों की गिरफ्तारी तथा परिवार को धमकी मिलना बंद नहीं होता है तो पुनः इस मामले को उच्च स्तर पर उठाएंगे।
उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि हत्या में सीधे तौर पर शामिल अपराधियों के प्रति सख्त रुख अपनाया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्य सचिव से बातचीत की गई है और सरकार से उचित मुआवजा उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
भरत तिवारी मामले पर बोले मांझी
सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भोजपुर में हुई पुलिस मुठभेड़ को पूरी तरह जायज ठहराया है। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के द्वारा उठाए जा रहे सवालों और आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
मांझी ने कहा कि इस एनकाउंटर पर सवाल उठाना गलत है। मृतक के परिजनों द्वारा उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जाने के दावों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि अगर वह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था, तो उसके पास हथियार कहां से आया? उन्होंने परिजनों पर सवाल दागते हुए कहा कि घर वालों ने उससे रिवॉल्वर वापस क्यों नहीं ली, जिससे यह अंदेशा होता है कि उसे जानबूझकर इस कदम के लिए उकसाया गया था।
सुरक्षाबलों पर हमलों पर जताई फिक्र
हालिया दिनों में पुलिसकर्मियों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि आज के समय में कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके साथ मारपीट की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उस घटना में दो पुलिसकर्मी अपनी जान गंवा देते, तो क्या उसे सही माना जाता?
केंद्रीय मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि अगर वहां दो पुलिसकर्मी मारे जाते तो क्या वो ठीक होता? पुलिस मारे तो ठीक, और पुलिस एनकाउंटर करे तो खराब? उन्होंने दोटूक कहा कि अगर कोई पुलिस पर पिस्टल तानेगा, तो पुलिस एनकाउंटर करेगी ही और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
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