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बिहार-झारखंड

पंपों ने धोखा दिया तो डूब जाएगा पटना, रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा गंगा का जलस्तर

गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में पानी को शहर में नहीं घुसने देना भर चुनौती नहीं है। इससे बड़ी चुनौती शहर के भीतर जमा वर्षा व नालों के पानी को बाहर निकालना है। इसका पूरा दारोमदार पंपिंग सिस्टम पर है।

यदि बिजली आपूर्ति में बाधा, पंप में खराबी या नालों में रुकावट हुई तो निचले इलाकों में पानी तेजी से पैर पसार सकता है। इन्हीं कारणों से 2019 की बाढ़ में नाले और पंपिंग व्यवस्था बेबस हो गए थे और शहर के कई हिस्सों में नावें चलानी पड़ी थीं।

ॉइस वर्ष भी दीघा स्थित बिंद टोली और वार्ड 22-ए के मखदूमपुर मोहल्ले की कई गलियों के करीब 200 मकानों तक पानी पहुंच गया है। सभी प्रमुख घाट और आसपास का परिसर जलमग्न हो चुका है।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बुडको) व जिला प्रशासन जलनिकासी के पुख्ता इंतजाम का दावा कर रहा है लेकिन एक चूक इतिहास दोहरा सकती है।

नई व्यवस्था व तीन माह की तैयारी की अग्निपरीक्षा

2019 में नावें चलने के बाद राजधानी की ड्रेनेज व्यवस्था में विस्तार और पंपिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। 2026 की मानसून तैयारी जून माह में ही शुरू कर दी गई। 56 स्थायी व 35 अस्थायी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन हर समय चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी बड़े नालों, छोटे नालों, कैचपिट और मैनहोल की जांच-सफाई तथा पंपों को कार्यरत रखने पर जोर दिया।

2026 में आठ नए उच्च क्षमता वाले डीपीएस जोड़े गए हैं। राजीव नगर, दीघा कैनाल, दानापुर, बाजार समिति, टीवी टावर, दशरथा, नंदलाल छपरा और प्रेमकुंज जैसे क्षेत्रों में उच्च क्षमता के डीवाटरिंग पंप लगाए गए हैं।

बुडको ने पंपों की मरम्मत, ट्रायल रन और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की है। पहाड़ी, योगीपुर, सैदपुर, मंदिरी, राजापुर-गोसाईं टोला, कुर्जी और इको पार्क के सात प्रमुख डीपीएस की 24 घंटे निगरानी में इंजीनियर तैनात किए गए। अब इन नई व्यवस्थाओं व पंपिंग की वास्तविक क्षमता की परीक्षा का समय आ गया है।

वर्षा जारी रही तो….सता रहा डर

पटना के नालों व ड्रेनेज नेटवर्क का पानी अंतत: गंगा की ओर जाता है। गंगा का जलस्तर उच्चतम स्तर पर आने के दो दिन पूर्व ही सुरक्षा तटबंध में बने 108 गेट व 13 स्लुइस गेट पहले ही बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में नालों का पानी खुद बाहर नहीं जा पाएगा, इसे नदी में धकेलने के लिए पंपिंग की जरूरत होगी।

2019 में यही स्थिति थी। लगातार वर्षा व गंगा-पुनपुन के ऊंचे जलस्तर ने शहर के ड्रेनेज आउटफाल को ध्वस्त कर दिया था। नतीजा वर्षा बंद होने के कई दिन बाद तक पानी नहीं निकला और राजेंद्र नगर-कंकड़बाग जैसे इलाकों में छह फीट तक पानी जमा हो गया था।

नौ बड़े नाले बनेंगे पहली सुरक्षा रेखा

शहर की जलनिकासी में सर्पेन्टाइन नाला, मंदिरी नाला, कुर्जी-राजीव नगर नाला, आनंदपुरी नाला, बाकरगंज नाला, बाईपास के एनसीसी व केबीसी क्षेत्र के नाले, योगीपुर नाला और सैदपुर नाला अहम हैं।

इन नालों में पानी का प्रवाह बाधित हुआ तो उसका असर सिर्फ एक मोहल्ले तक सीमित नहीं रहेगा। 2026 में प्रशासन ने नौ बड़े नालों के साथ पूरे कैचमेंट, डीपीएस, सड़क, पुल और निकासी नेटवर्क की संयुक्त जांच कराई थी।

सावधानी जरूरी, इन बातों का रखें ध्यान

  • – घाट-नदी किनारे जाने से बचें
  • -बच्चों-बुजुर्गों को पानी से दूर रखें
  • – घर में जरूरी सामान ऊंचाई पर रखें
  • – बिजली के उपकरणों से दूरी रखें
  • – जलजमाव में वाहन नहीं चलाएं
  • – सांप या जहरीला जीव दिखे तो खुद पकड़ने की कोशिश नहीं करें
  • – पीने के पानी को लेकर विशेष सावधानी बरतें
  • – आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करें
  • -जलजमाव संबंधी शिकायत के लिए पीएमसी हेल्पलाइन 155304 या जिला नियंत्रण कक्ष में फोन करें।
  • – अफवाह नहीं, प्रशासन की सूचना पर भरोसा करें

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