मध्य प्रदेश
इटली के पोम्पेई की तरह जमे उज्जैन के 42 रहस्यमयी कंकाल, क्या सुलझेगी 2300 साल पुरानी पहेली?
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले की एक पहाड़ी पर मिले 42 कंकालों की कहानी भी किसी प्राचीन थ्रिलर फिल्म जैसा लगता है। यहां कोई कंकाल औंधे मुंह पड़ा है, तो कोई पीठ के बल। कुछ बैठे हुए हैं, तो कुछ अजीबोगरीब तरीके से मुड़े हुए हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं और पुरुष सभी शामिल हैं।
कुछ दफनाए गए हैं, तो कुछ जलाए गए हैं। दशकों से खामोश पड़े ये अवशेष आज भी उस रहस्यमयी घटना के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिसने उन्हें इस मुद्रा में हमेशा के लिए दफन कर दिया। बिना किसी ज्वालामुखी विस्फोट के भी, मध्य प्रदेश का यह इलाका इटली के उस बदकिस्मत पोम्पेई शहर की याद दिलाता है, जहां एक झटके में पूरी सभ्यता मौत की आगोश में सो गई थी।
कुम्हार टेकरी का 90 साल पुराना रहस्य
उज्जैन की कुम्हार टेकरी में लगभग नौ दशक पहले 1938-39 खुदाई के दौरान 42 कंकाल मिले थे। ये कंकाल आज भी एक पुरातात्विक पहेली बने हुए हैं, ये लोग कौन थे? उन्हें इतने अलग-अलग और अजीबोगरीब तरीकों से क्यों दफनाया गया था? क्या वे अलग-अलग समुदायों के थे?
ब्रिटिश काल के दौरान ग्वालियर राज्य के पुरातात्विक विभाग द्वारा की गई इस खुदाई में कंकालों के साथ सीप के आभूषण, राख और हड्डियों वाले कलश, कप और प्लेटें भी मिली थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये अवशेष तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं, हालांकि इनके और भी पुराने होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षणों की मांग
खुदाई में मिले अवशेष बेहतर स्थिति में थे, उन्हें मानवशास्त्रीय परीक्षण के लिए भेज दिया गया था और वर्तमान में वे कोलकाता में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास सुरक्षित हैं।
डेक्कन कॉलेज पोस्ट-ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे की एसोसिएट प्रोफेसर वीणा मुश्रीफ-त्रिपाठी ने आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की सिफारिश की है, जिन्होंने 2007-08 में इन अवशेषों पर शोध किया था।
उनका कहना है कि उम्र, लिंग, वंशावली और आहार की स्पष्ट जानकारी के लिए AMS यानी एडवांस रेडियोकार्बन डेटिंग, डीएनए विश्लेषण और आइसोटोप अध्ययन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रोफेसर मुश्रीफ-त्रिपाठी के अनुसार, केवल दफनाने के तरीके के आधार पर सांस्कृतिक पहचान की पुष्टि करना मुश्किल है। पूरी संभावना है कि ये लोग अलग-अलग समूहों या समुदायों के थे। एक ही जगह पर शवों को दफनाने और जलाने दोनों के साक्ष्य मिलने से इस बात को और बल मिलता है।
वैश्य टेकरी की खुदाई से जुड़ सकती हैं कड़ियां
रहस्य को सुलझाने के लिए ASI के क्षेत्रीय कार्यालय ने हाल ही में कुम्हार टेकरी यानी पॉटर्स हिल से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित वैश्य टेकरी में खुदाई के लिए अपने मुख्यालय से अनुमति मांगी है।
यह स्थल एक विशाल स्तूप का घर है, जिसका व्यास सांची के स्तूप से लगभग तीन गुना बड़ा है। पुरातत्वविदों का मानना है कि इससे इन रहस्यमयी कंकालों का ऐतिहासिक संदर्भ मिल सकता है।
ASI भोपाल सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. शिवकांत वाजपेयी का कहना है कि वैश्य टेकरी में खुदाई से जांचकर्ताओं को निश्चित रूप से मदद मिलेगी और कुम्हार टेकरी के कंकालों की कहानी को व्यापक ऐतिहासिक परिदृश्य में रखा जा सकेगा।
पिछले 2,300 वर्षों से ये कंकाल खामोश हैं। लेकिन पोम्पेई के विपरीत, अभी तक कोई नहीं जानता कि ये लोग वास्तव में कौन थे। नई खुदाई और आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षण अंततः इन कंकालों की खामोशी तोड़ सकते हैं।
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