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हरियाणा विधानसभा में धान घोटाले पर हंगामा, CBI जांच की मांग पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

चंडीगढ़, 27 फरवरी 2026: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज धान खरीद से जुड़े कथित घोटाले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दल कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकार का पक्ष रखते हुए विस्तृत जवाब दिया।

कांग्रेस का आरोप: किसानों के साथ अन्याय

कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि धान खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना था कि खरीद केंद्रों पर फर्जी बिलिंग, गुणवत्ता जांच में गड़बड़ी और भुगतान में देरी जैसी शिकायतें लगातार सामने आई हैं। विपक्ष ने दावा किया कि इस मामले में उच्चस्तरीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कहा कि “यदि सरकार पारदर्शिता में विश्वास रखती है तो CBI जांच से पीछे क्यों हट रही है?” इस दौरान विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी की और कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित रही।

मुख्यमंत्री का जवाब: ‘घोटाले के आरोप निराधार’

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि धान खरीद पूरी तरह पारदर्शी प्रणाली के तहत की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार रिकॉर्ड स्तर पर किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद हुई है और भुगतान भी समयबद्ध तरीके से किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो राज्य स्तर पर जांच के लिए सक्षम एजेंसियां मौजूद हैं। CBI जांच की मांग केवल राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया की निगरानी के लिए डिजिटल पोर्टल और ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली लागू की है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

सदन में तीखी बहस

मुख्यमंत्री के जवाब के बाद भी विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा। कांग्रेस विधायकों ने दोबारा CBI जांच की मांग दोहराई और कहा कि राज्य एजेंसियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए कथित घोटालों का मुद्दा उठाया।

करीब एक घंटे तक चली बहस के दौरान कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। स्पीकर ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बजट पर रचनात्मक चर्चा करने की अपील की।

किसानों की चिंता और राजनीतिक संदेश

धान खरीद हरियाणा की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहा है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों को सामने रखकर जवाब दे रही है।

किसान संगठनों की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। कुछ संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने कहा कि यदि भुगतान और खरीद प्रक्रिया सुचारू है तो विवाद को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

आगे क्या?

सरकार ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो आंतरिक ऑडिट या विशेष जांच दल (SIT) के माध्यम से तथ्यों की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि फिलहाल CBI जांच के संकेत नहीं दिए गए हैं।

बजट सत्र के शेष दिनों में भी इस मुद्दे पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि धान घोटाले का यह विवाद आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

निष्कर्ष:
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में धान खरीद को लेकर उठा विवाद सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराव का कारण बना हुआ है। जहां कांग्रेस CBI जांच पर अड़ी है, वहीं सरकार आरोपों को निराधार बताते हुए पारदर्शिता का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई ठोस जांच प्रक्रिया शुरू होती है या राजनीतिक बहस यूं ही जारी रहती है।

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