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लाइटर जलाते ही गैस सिलेंडर में भड़की आग, फिर हुआ तेज विस्फोट; मदद के लिए जमुई एजेंसी को लगाया फोन… नो रिस्पॉन्स

Jamui Khaira Gas Cylinder Blast: जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत हरनी पंचायत में गुरुवार की देर रात खाना बनाने के दौरान गैस सिलेंडर में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों ने पूरे कमरे को अपनी जद में ले लिया और कुछ ही पलों बाद तेज आवाज के साथ सिलेंडर में जोरदार विस्फोट हो गया। जोरदार धमाके की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा और आसपास के घरों में अफरा-तफरी मच गई।

गनीमत यह रही कि स्थानीय ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता के चलते समय रहते जलते हुए सिलेंडर को रिहायशी मकान से बाहर फेंक दिया गया था, जिससे मकान में रहने वाले छह परिवारों के दर्जनों लोग बाल-बाल बच गए।

लाइटर जलाते ही भड़क उठी आग, मची चीख-पुकार

मिली जानकारी के अनुसार, हरनी पंचायत निवासी रणजीत तांती की 15 वर्षीय पुत्री काजल कुमारी गुरुवार देर रात घर की रसोई में रात का खाना पकाने की तैयारी कर रही थी। जैसे ही उसने गैस चूल्हे को जलाने के लिए लाइटर का इस्तेमाल किया, पाइप या रेगुलेटर से पहले से हो रहे गैस रिसाव के कारण अचानक भभककर आग लग गई।

लपटें इतनी तेज थीं कि जब तक किशोरी कुछ समझ पाती, आग तेजी से सीधे सिलेंडर के मुख्य वाल्व तक पहुंच गई। रसोई से धुआं और आग की लपटें उठती देख परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई और जान बचाने के लिए लोग बाहर की ओर भागे।

पानी-बालू से बुझाने का प्रयास विफल, जलते सिलेंडर को निकाला बाहर

चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़ पड़े। लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए पानी की बौछार, बालू और भीगे बोरों-कंबलों की मदद से आग पर काबू पाने की भरसक कोशिश की, लेकिन गैस के भारी दबाव के कारण आग विकराल होती चली गई।

स्थिति को बेकाबू और जानलेवा होते देख ग्रामीणों ने भारी जोखिम उठाकर सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने किसी तरह जलते हुए सिलेंडर को कमरे से खींचकर बाहर खुले स्थान पर फेंक दिया। इस बीच फौरन अग्निशमन विभाग (फायर ब्रिगेड) को फोन कर सूचना दी गई, लेकिन जब तक दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंचती, बाहर फेंका गया सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फटकर टुकड़ों में बिखर गया।

एक ही छत के नीचे रहते हैं 6 परिवार, एजेंसी पर फूटा गुस्सा

बताया जाता है कि जिस मकान में यह घटना घटी, उसमें संयुक्त रूप से कुल छह परिवार रहते हैं। यदि जलता हुआ सिलेंडर घर के अंदर ही फट जाता, तो पूरे मकान के धराशायी होने के साथ-साथ भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था।

वहीं घटना के दौरान जब आग लगी थी, तब काजल के चचेरे भाई ने आपातकालीन मदद के लिए गैस एजेंसी की पासबुक पर दर्ज मोबाइल नंबरों पर लगातार कॉल किया, लेकिन किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। सुरक्षा नंबर पर कॉल रिसीव न होने से ग्रामीणों में संबंधित गैस एजेंसी के प्रति भारी नाराजगी और आक्रोश देखा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना में किसी के हताहत न होने की पुष्टि की है, हालांकि इलाके में देर रात तक दहशत का माहौल बना रहा।

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