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मध्य प्रदेश

इंदौर में जमीन अधिग्रहण के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, गैस चूल्हा-टंकी के साथ शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना

नएचएआई की प्रस्तावित पूर्वी बायपास परियोजना और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर एकत्र हुए और अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत कर दी। किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

धरने की सबसे खास बात यह रही कि किसान अपने साथ गैस चूल्हे और गैस सिलेंडर लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि वे लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखेंगे।

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खंडवा रोड क्षेत्र के सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, खुड़ैल और आसपास के गांवों से पहुंचे किसानों ने प्रशासन और परियोजनाओं के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर ‘उपजाऊ जमीन बचाओ’, ‘किसानों की जमीन अधिग्रहण बंद करो’ और ‘खेती नहीं तो भोजन नहीं’ जैसे संदेश लिखे हुए थे।

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किसानों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। किसान नेता जितेंद्र पाटीदार ने कहा कि सरकार को वैकल्पिक भूमि तलाशनी चाहिए और खेती योग्य जमीन को अधिग्रहण की प्रक्रिया से बाहर रखना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित परियोजनाओं के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार किया जाए।

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सबसे अधिक विरोध एनएचएआई की प्रस्तावित पूर्वी बायपास परियोजना को लेकर देखने को मिल रहा है। लगभग 84 किलोमीटर लंबी यह सड़क एबी रोड से शुरू होकर महू, सिमरोल और कंपेल होते हुए देवास जिले के शिप्रा क्षेत्र के पास पुनः एबी रोड से जुड़ेगी। किसानों के विरोध के चलते इस परियोजना का लेआउट पहले भी एक बार बदला जा चुका है, लेकिन असंतोष अभी भी बरकरार है।

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धरना प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग किसान की तबीयत बिगड़ने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति भी बनी। वहीं आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस मामले में हाल ही में हाई कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए एनएचएआई और जिला प्रशासन को नोटिस जारी किए हैं। ऐसे में किसानों का यह आंदोलन आगामी दिनों में और अधिक राजनीतिक एवं प्रशासनिक महत्व हासिल कर सकता है।

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