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MP: भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने मंच से दुर्दांत डकैत रामबाबू गड़रिया को कहा ‘भाई’, तस्वीर पर किया माल्यार्पण

वीरांगना अहिल्या बाई होलकर की 301वीं जयंती पर मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर में आयोजित कार्यक्रम में आयोजकों ने वीरांगना की तस्वीर के साथ ग्वालियर चंबल अंचल के दुर्दान्त डकैत रहे रामबाबू गडरिया की तस्वीर भी रख दी।

प्रीतम बोले- जेल, जंगल में निभाई दोस्ती

इतना ही नहीं, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने दुर्दान्त डकैत को ‘रामबाबू जी’ कहकर संबोधित किया और उसे अपना भाई बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि वह रामबाबू से न सिर्फ जेल में मिले, बल्कि जंगल में भी उनके साथ दोस्ती निभाई। उनकी बहन पर अत्याचार होने पर उनके परिवार का साथ देते हुए पांच हजार लोगों के साथ कमिश्नरी घेर ली थी, तब लोगों ने कहा था कि एक गुंडा, एक डकैत का साथ दे रहा है।

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‘गुंडा व डकैत भी होते हैं इंसान’

विधायक प्रीतम लोधी ने आगे कहा कि क्या एक गुंडा और एक डकैत इंसान नहीं होते हैं? वह बहुत सौभाग्यशाली हैं कि आज उन्हें अपने भाई की तस्वीर पर माल्यार्पण करने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने पाल-बघेल समाज के लोगों को भरोसा दिलाया कि जिस तरह रामबाबू के साथ था, वैसे ही आपके साथ रहकर आपका संरक्षण करूंगा। प्रीतम लोधी के अनुसार रामबाबू गडरिया सामंतशाही से परेशान होकर डकैत बना था।

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आईपीएस को धमकाया था लोधी ने

बता दें कि विधायक प्रीतम लोधी वहीं हैं, जिनके बेटे ने कुछ समय पहले राह चलते पांच लोगों पर अपनी थार गाड़ी चढ़ा दी और घायलों को धमकाया। इसके बाद पुलिस कार्रवाई पर विधायक ने एक आईपीएस अधिकारी को धमकी दी थी।

रामबाबू गड़रिया गिरोह ने 13 लोगों को कतार में खड़ा कर मारी थी गोली

बता दें कि पांच लाख का इनामी डकैत रामबाबू गड़रिया को पुलिस रिकॉर्ड में टी-1 यानी टारगेट-वन कहा जाता था। ग्वालियर के हरसी गांव के रहने वाले भाई दयाराम गड़रिया के साथ उसके गिरोह का 1989 से 2007 तक आतंक रहा। दिन-दहाड़े अपहरण, लूट और हत्याओं के साथ कई पुलिसकर्मी भी गिरोह के निशाने पर आए।

सबसे खौफनाक वारदात में मुखबिरी के शक में ग्वालियर के भंवरपुरा गांव में 13 गुर्जरों को एक लाइन में खड़ा करके गोली मारने की थी। यह घटना देशभर में सुर्खियां बनी थी। 1999 और 2007 में इसके एनकाउंटर में मारने का दावा किया गया, परंतु वह झूठा निकला। अंत में अप्रैल 2007 खोड़ के जंगल में मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया। इसके बाद गैंग का मूवमेंट रुक गया, हालांकि मारे गए व्यक्ति की मौत पर पाल-बघेल समाज अब भी सवाल उठाता रहा है।

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