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मध्य प्रदेश

डिंडौरी में साल के जंगलों के दुश्मन 19.25 लाख बोरर कीट होंगे खाक, चार DFO की मौजूदगी में होगा दहन; 1.46 लाख पेड़ भी चिन्हित

 प्रदेश के डिंडौरी जिले में साल के जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे साल बोरर कीटों के खिलाफ वन विभाग ने बड़ा अभियान छेड़ा है। ग्रामीणों की मदद से अब तक 19 लाख 25 हजार 118 कीटों का संग्रहण किया जा चुका है। इन्हें जिले के आठ संग्रहण केंद्रों में सुरक्षित रखा गया था। अब विभाग इन सभी कीटों को नष्ट करने की तैयारी में जुट गया है।

चार डीएफओ की मौजूदगी में होगा दहन

वन विभाग के अनुसार 24 सितंबर को सभी आठ संग्रहण केंद्रों से साल बोरर कीटों को एक निर्धारित स्थान पर लाकर विधिवत जलाया जाएगा। नष्टीकरण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी डिंडौरी सहित मंडला जिले के चार डीएफओ करेंगे। एसडीओ, रेंजर और वन समितियों के सदस्य भी मौके पर मौजूद रहेंगे। पारदर्शिता के लिए पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई जाएगी।

एक कीट के बदले दो रुपये भुगतान

साल बोरर के खिलाफ अभियान में वन विभाग ने ग्रामीणों को भी जोड़ा है। ग्रामीणों को प्रति कीट दो रुपये पारिश्रमिक दिया गया। इस तरह कीट संग्रहण के लिए करीब 40 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। ग्रामीणों ने जंगलों से कीटों को पकड़कर पारंपरिक तरीके से उन्हें ‘सिर की माला’ के रूप में एकत्र किया और बाद में संग्रहण केंद्रों में जमा कराया।

पेड़ को खोखला कर देता है कीट

साल बोरर कीट साल के पेड़ों के लिए बेहद घातक माना जाता है। यह पेड़ के तने में छेद कर अंदर प्रवेश करता है और उसे भीतर से खोखला कर देता है। इसके चलते पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है। डिंडौरी जिले में बोरर के प्रकोप से प्रभावित 1 लाख 46 हजार 784 साल के पेड़ चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

डिंडौरी-मंडला में बढ़ा था प्रकोप

पिछले कुछ वर्षों में डिंडौरी और मंडला वन वृत्त में साल बोरर का प्रकोप दोबारा तेजी से बढ़ा है। इससे बड़ी संख्या में साल के पेड़ों के सूखने का खतरा पैदा हुआ। वन विभाग का मानना है कि कीटों के सामूहिक संग्रहण और नष्टीकरण से इनके प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा और साल के जंगलों को बचाने में मदद मिलेगी।

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